रायपुर। एक जमाने में अपराधियों को ढूंढ़ने, खासकर ब्लाइंड केस को सुलझाने में जांच दल के साथ बराबरी की भूमिका पुलिस के खोजी कुत्ते निभाते थे। इन दिनों अपराधियों की गंध से इनकी दूरी बढ़ गई है। ये वीआइपी ड्यूटी में लगे हैं। गली मोहल्लों में चोरी, हत्या और डकैती जैसी वारदातों में खोजी कुत्ते कई बार पुलिस की जांच की दिशा बदल देते थे। लेकिन जिले में क्राइम ब्रांच की यूनिट ने इन प्रकरणों से डाग स्क्वाड को दूर रखा है।

ऐसे में अचानक कभी गंध पकड़ने की आवश्यकता पड़ने पर पहले जैसी चुस्ती-फूर्ती पर संदेह है। डीएसपी क्राइम अभिषेक माहेश्वरी के मुताबिक डाग स्क्वाड से बेहतर परिणाम तकनीकी जांच के हैं। आज के दौर में सीसीटीवी कैमरा, सीडीआर और दूसरी तरह की टेक्नोलाजी ज्यादा कारगर है।

जिले में एक ही ट्रैकर

डाग स्क्वाड पर घटती पुलिस की दिलचस्पी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि स्क्वाड में केवल एक ही खोजी कुत्ता ट्रैकर की भूमिका में है। पिछले साल बेल्जियम शेफर्ड, लेबराडोर की खरीदारी कर भिलाई में ट्रेनिंग दी गई। ट्रेनिंग पूरी होने के बाद कभी डिमांड नहीं की गई, जबकि शहर में हर साल सैकड़ों प्रकरण चोरी के दर्ज हो रहे हैं। सूने मकानों में चोर धावा बोल रहे हैं।

दल में चार खोजी कुत्ते एक्सप्लोसिव एक्सपर्ट

खोजी कुत्तों में जैक-जर्मन शेफर्ड, जीमी - मोंगरेल, लारा- लेबराडोर, चार्ली लेबराडोर आदि एक्सप्लोसिव एक्सपर्ट हैं। टार्जन ट्रैकर है। खोजी कुत्तों की आयु आठ साल के ऊपर है।

ठंड में विशेष इंतजाम, कमरे में गर्म चादर

खोजी कुत्तों की देखरेख में एहतियात बरती जा रही है। ठंड बढ़ने के बाद सभी के कमरों में कंबल रखे गए हैं। खाने में भी मांस की मात्रा बढ़ा दी गई है।

इसलिए खोजी कुत्तों में घट रही दिलचस्पी

1 प्रकरणों की जांच के लिए सीसीटीवी कैमरे पर पुलिस का फोकस।

2 शहर में वाहनों के शोर और प्रदूषण की वजह से गंध पकड़ने में खोजी दस्ते को परेशानी।

3 अपराधियों ने अपराध का ट्रेंड बदला। पुलिस से बचने की प्लानिंग पहले करते हैं।

4 छछानपैरी, सेजबहार बस्ती और नया रायपुर में अंधे कत्ल के मामलों में डाग स्क्वाड से नहीं मिला कोई क्लू।

5 साइबर अपराध बढ़ने और अपराधियों के हाथों नई-नई टेक्नोलाजी होने की वजह से परंपरागत जांच के तरीकों में पुलिस ने किया बदलाव।