रायपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

प्रदेश के किसानों को अब फसल की गुणवत्ता की जांच के लिए दूसरे राज्यों की तरफ भटकना नहीं पड़ेगा, क्योंकि इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय की लैब में फसल की गुणवत्ता की जांच चुनाव परिणाम के बाद शुरू हो जाएगी। विभाग तेजी से इसकी तैयारी में जुट गया है। अधिकांश मशीनों का इंस्टाल किया जा चुका है। बाकी काम भी अंतिम चरण में है। विवि के साइंटिस्ट डॉ. सतीश बी वेरूलकर के अनुसार प्रदेश में फसलों की गुणवत्ता की जांच के लिए लिए लैब नहीं होने से सही बीज की पैदावार किसान नहीं कर पा रहे हैं। इससे एक तरफ किसानों को लागत निकालना भारी हो रहा था, वहीं पारंपरिक फसलों में मुनाफा निकालने में दिक्कत आ रही थी। इसलिए राज्य सरकार के निर्देश पर फसलों की गुणवत्ता बताने वाली लैब का निर्माण किया जा रहा है। इस लैब को यूएसए की मशीनों से लैस किया जाएगा। मशीन में फसल का सैंपल डालने पर उसकी गुणवत्ता की बारीकी जांच हो जाएगी।

प्रदेश में धान के अलावा दूसरे फसलों की पैदावार को बढ़ाने के लिए विवि लगातार रिसर्च, किसानी में जुटा है। इसी के चलते जीरा राइस चावल, अब गेहूं की चार अन्य वैराइटी 1023 भी जारी हो चुका है। यह मध्यप्रदेश की चर्चित सरबती गेहूं के अधिकांश गुणों से मिलता जुलता गेहूं है। इसी तरह से टिश्यू कल्चर के माध्यम से केला, गन्ना फसल की बेहतर पैदावार ली जा सकती है।