रायपुर। नगरीय निगमों, पालिकाओं और नगर पंचायतों को आर्थिक संकट से उबारने के जतन किए जा रहे हैं। इस गरज से अब महानगरों की मदद निजी कंपनियां किया करेंगी। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने कंसल्टेंट नियुक्त करने के लिए टेंडर मांगा है। इसमें दिल्ली, कोलकाता, गुड़गांव और मुंबई की सात कंपनियां शामिल होने पहुंचीं। तकनीकी निविदा खोली गई तो मुंबई की दो कंपनियां बाहर हो गईं। अब पांच कंपनियों की वित्तीय निविदा का परीक्षण किया जा रहा है।

इसलिए सरकार ने की पहल

नगरीय निकायों के राजस्व में वृद्धि के लिए क्या उपाय किए जाएं? इस पर विभागीय मंत्री से लेकर मंत्रालय, संचालनालय, निकायों के अधिकारियों के अलावा स्थानीय विशेषज्ञों के साथ मंत्रणा की जा चुकी है।

परंपरागत कर और शुल्क को ही बढ़ाने की बात होती रही है। नए कर या शुल्क पर न विचार हो सका और न ही परंपरागत शुल्क की शत-प्रतिशत वसूली में सफलता मिल पाई है।

रायपुर नगर निगम को छोड़कर शेष 167 नगरीय निकायों की आय में अपेक्षानुरूप वृद्धि नहीं हो पा रही है। ऐसी स्थिति में थक-हारकर राज्य सरकार ने यह फैसला लिया कि महानगर पालिकाओं में जिस तरह से राजस्व की वसूली होती है, उसी फॉर्मूले को अपनाया जाए।

निजी कंपनियों को बुलाया

सरकार ने महानगरों की निजी कंपनियों का टेंडर बुलाया। टेंडर का पहला चरण पूरा हो चुका है। तकनीकी निविदा में मेसर्स आईसीआरए मैनेजमेंट कंसल्टिंग सर्विसेस लिमिटेड नोएडा, मेसर्स अरनस्ट एंड यंग एलएलपी (ईवाय) नई दिल्ली, मेसर्स क्रिसिल रिस्क इंफ्रा वेंचर्स सॉल्यूशन लिमिटेड गुड़गांव, मेसर्स पीडब्ल्यूसी (प्रिंसवॉटर हाउस कूपर्स प्रायवेट लिमिटेड) गुड़गांव, मेसर्स डेलोइट्ट टच तोहमात्सु इंडिया लिमिटेड कोलकाता को आगे की प्रक्रिया में शामिल कर लिया गया है।

जबकि मेसर्स चॉइस कंसल्टेंसी सर्विसेस लिमिटेड मुंबई और मेसर्स एक्वा पम्प्स इंफ्रावेंचर्स लिमिटेड मुंबई बाहर कर दी गईं। मंगलवार को नगरीय प्रशासन विभाग ने चयनित पांचों कंपनियों की वित्तीय निविदा खोली। अब उन्हें निविदा समिति के पास परीक्षण के लिए भेजा जाएगा। जिस कंपनी का शुल्क कम होगा, उसे कंसल्टेंट नियुक्त किया जाएगा।

निजी कंपनी के माध्यम से वसूली का प्रयोग फेल

नगरीय निकायों की आय बढ़ाने के लिए राज्य सरकार लगातार प्रयोग कर रही है। इसके पहले प्रयोग के तौर पर दुर्ग, भिलाई और बिलासपुर नगर निगम क्षेत्र में राजस्व वसूली का ठेका निजी कंपनी को दिया गया है।

नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री अमर अग्रवाल ने खुद माना है कि इसका अच्छा परिणाम नहीं रहा है। निजी कंपनी को ठेका देने के बावजूद जलसंसान विभाग से पानी लेने और पाइपलाइन के मेंटेनेंस तक का खर्च नहीं निकल पा रहा।

नगरीय निकायों में राजस्व की वृद्धि के कई उपाय हो सकते हैं, लेकिन सरकार के दबाव के बावजूद निकाय नए उपायों पर विचार नहीं कर रहे। इस कारण निजी कंपनियों की मदद ली जाएगी। ये कंपनियां बताएंगी कि कहां, कैसे और किस तरह से वसूली करके राजस्व को बढ़ाया जा सकता है। अभी टेंडर की प्रक्रिया जारी है। - निरंजन दास, संचालक, नगरीय प्रशासन विभाग