रायपुर (नईदुनिया राज्य ब्यूरो)। छत्तीसगढ़ में सरकार ने किसानों का कर्ज माफ करने का एलान किया है। यहां की कर्ज माफी का प्रचार कांग्रेस देशभर की अपनी सभाओं में कर रही है। लेकिन इसी बीच बैंक का कर्ज न चुका पाने के कारण बस्तर के दो किसानों को जेल भेज दिया गया है। राष्ट्रीय किसान परिषद के प्रांताध्यक्ष सुरेश यादव का आरोप है कि आदिवासी किसानों को बैंक अफसरों और दलालों की मिलीभगत से लूटा गया है। किसान जेल में हैं और उनकी जमानत तभी हो सकती है जब वे कर्ज की राशि का कम से कम 20 फीसद चुका दें।
दोनों किसानों की आर्थिक हालत ऐसी नहीं है कि वे पैसे चुका पाएं। ग्राम भाटपाल के किसान तुलाराम मौर्य पिता शम्भूराम मौर्य तथा ग्राम बस्तर के किसान सुखदास पिता पिलीराम ने दिसंबर में जगदलपुर धरमपुरा स्थित स्टेट बैंक से ड्रिप एरीगेशन के नाम पर क्रमश: 10 लाख और 4 लाख का कर्ज लिया था। दोनों आदिवासी किसानों का आरोप है कि मोगरापाल गांव के बल्लू चावड़ और रघु सेठिया ने उन्हें बैंक से कर्ज दिलाने का वादा किया और कागजात पर हस्ताक्षर करा लिया। प्रस्ताव पांच एकड़ का बनाया गया जबकि ड्रिप एरीगेशन का इंतजाम आधे एकड़ में किया गया है।
बाकी की राशि दलालों ने बैंक अधिकारियों की मिलीभगत से अपने खातों में ट्रांसफर करा ली। जब किसानों के पास लाखों की वसूली का नोटिस आने लगा तो वे बैंक पहुंचे और कर्ज की फाइल दिखाने को कहा। लेकिन बैंक अफसरों ने उन्हें डांटकर भगा दिया। बाद में उनके चेक बाउंस का केस कोर्ट में लगा दिया। शुक्रवार को पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया और दोनों को जेल भेज दिया।
कर्जमाफी की कलई खुली-भाजपा
भाजपा प्रवक्ता संदीप शर्मा ने कहा है कि किसानों की गिरफ्तारी से सरकार की कर्जमाफी योजना की पोल खुल गई है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी अपनी सभाओं में कर्ज माफी की बात जोरशोर से उठा रहे हैं जबकि यहां राष्ट्रीयकृत बैंकों से कर्ज लेने वाले किसान ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।