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    बेटियों को रिश्ते निभाने का गुर सिखा रहा यह अनोखा स्कूल

    Published: Sun, 14 Jan 2018 11:44 AM (IST) | Updated: Sun, 14 Jan 2018 11:51 AM (IST)
    By: Editorial Team
    raipur girls school special 2018114 11508 14 01 2018

    जय प्रकाश पांडेय, रायपुर। शिक्षा से लेकर रोजगार तक, बेटियां किसी भी क्षेत्र में अब बेटों से कमतर नहीं हैं। लेकिन इस आपाधापी में करियर और परिवार के बीच सामंजस्य बना पाना दोनों के लिए कठिन होता जा रहा है। सम्मिलित परिवार का वजूद पहले ही खत्म हो चला है। एकल परिवार का दौर था, वह भी मानो खात्मे की ओर है। अब तो एकला चलो रे का दौर चल पड़ा है।

    शादी नामक संस्था नौकरी और परिवार रूपी दो पाटों के बीच पिस कर रह जा रही है। तलाक के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। बेटा हो या बेटी, तलाक का दंश दोनों की जिंदगियों को झकझोर डालता है। छीजते रिश्तों को मजबूत करने में बेटियां कैसे अहम भूमिका निभा सकती हैं, करियर और परिवार के बीच बेहतर सामंजस्य कैसे बैठा सकती हैं, जीवन के कठिन क्षणों और चुनौतियों का सामना किस तरह कर सकती हैं.., इन सब बातों की सीख यहां चल रहे फिनिशिंग स्कूल में देश भर से जुटी सौ बेटियों को दी जा रही है।

    भारतीय जैन संगठना की ओर से देश भर में इस तरह की कक्षाएं नि:शुल्क रूप से संचालित की जा रही हैं। दिया जाता है व्यावहारिक प्रशिक्षण देश के विभिन्न् राज्यों से यहां पहुंचीं सौ प्रतिभागियों को अनुभवी विषय विशेषज्ञों द्वारा व्यावहारिक प्रशिक्षिण दिया जा रहा है। इनके सामने उन तमाम परिस्थितियों को निर्मित कर उनके समाधान का रास्ता दिखाया जाता है, जो कभी भविष्य में इनके सामने चुनौती के रूप में आ खड़ी हों तो अपनी सूझबूझ से ये उसका सामना कर सकें। हर साल इन कक्षाओं में तेरह दिनों का सत्र होता है। यहां रहने से लेकर भोजन व ट्रेनिंग सब कुछ नि:शुल्क है।

    पूरा भारत है इस परिसर में

    इस परिसर में इन दिनों मानो पूरा भारत जुट गया है। मुंबई से यहां आईं प्रथा कोटजा बताती हैं, हमें विचारों को शेयर करना, सकारात्मक सोच रखना, टाइम मैनेजमेंट आदि सब कुछ सिखाया जा रहा है। जैपुर ओडिशा की जागृति कहती हैं, हमने सीख लिया कि हमें अपने अभिभावकों से कुछ नहीं छिपाना चाहिए। महासमुंद की सपना, बालोद की पल्लवी और रायपुर की प्रियंका भी मानती हैं कि यहां आकर उनका जीवन के प्रति नजरिया बदल गया है, सोचने का तरीका बदल गया है। अब लगता है कि जिंदगी तो बांहे फैलाए खड़ी है, तमाम उलझनों से घिरे आप ही संकोच कर रहे हैं।

    इस तरह दी जाती है सीख जीवन में रिश्तों की अहमियत, इनके निर्वहन का तौर-तरीका, बदलाव की स्वीकार्यता व समन्वय, दूसरों के साथ स्वयं को भी सम्मान, करियर व परिवार के बीच बेहतर तालमेल, इसमें आने वाली चुनौतियों का सामना, बेहतर भावपूर्ण संबोधन, बेसिक चिकित्सा जानकारी, बीमार परिजन से व्यवहार, सकारात्मक सोच का निर्माण..., ऐसी 64 अलगअलग कक्षाएं यहां चल रही हैं। हर विषय के लिए अनुभवी विशेषज्ञ मौजूद हैं।

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