रायपुर/नई दिल्ली। देश के मात्र 18 फीसद गांवों में ही पाइपलाइन से नलों से पेयजल की आपूर्ति होती है। इसमें भी देश के उन प्रदेशों में पीने के शुद्ध पानी का संकट है, जहां नदियों की भरमार है और साल दर साल बाढ़ आती है। इन पूर्वी राज्यों उत्तर प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के ग्रामीण क्षेत्रों में मात्र पांच फीसद घरों में नल से पेयजल की आपूर्ति होती है। लिहाजा सरकार ने देश के 82 फीसद ग्रामीण हिस्से में पेयजल की आपूर्ति नल से करने का लक्ष्य तय किया है। सरकार ने वर्ष 2024 तक देश के बाकी सभी 14 करोड़ घरों में पानी पहुंचाने का निश्चय किया है।

यह जानकारी केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने राज्यों के पेयजल मंत्रियों के साथ बैठक के बाद उक्त जानकारी दी। अभी देश के एकमात्र राज्य सिक्किम के 99 फीसद घरों में ही नलों से जलापूर्ति की जाती है।

शेखावत ने राज्यों की ओर से उठाए गए मुद्दों के बारे में पूछे गए सवाल पर कहा कि राज्यों के साथ संघीय तरीके से काम करने की जरूरत है। जलापूर्ति के साथ जल संरक्षण पर विशेष जोर दिया गया, जिसे राज्यों ने भी स्वीकार किया।

उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान और बिहार में हर घर में नल से जलापूर्ति को लेकर विशेष अभियान की शुरुआत की गई है। अन्य प्रदेशों की भी इस दिशा में आगे बढ़ने को कहा गया है। ज्यादातर राज्यों के मंत्रियों ने जल संकट पर समान चिंताएं जताईं और इस समस्या से निपटने के लिए आगे बढ़ने को कहा।

पश्चिम बंगाल के सवाल पर बताया कि न वहां के मंत्री आए और न ही कोई प्रतिनिधि पहुंचा। एक अन्य सवाल के जवाब में शेखावत ने कहा कि सभी राज्यों में पानी की किल्लत बनी हुई है। इस समस्या को समग्रता के रूप में देखा जा रहा है।