रायपुर। एक तरफ छत्तीसगढ़ में राज्य सरकार अपनी देखरेख में शराब बेचवा रही है, तो वहीं दूसरी तरफ चुनाव में सभी छोटे दलों ने राज्य में पूर्ण शराबबंदी का राग अलाप कर एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। इससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या विधानसभा सभा चुनाव में शराबबंदी मुद्दा बन पाएगा।

राज्य में शराब एक बड़ा मुद्दा है, शराब को लेकर यहां राजनीति होती रही है। विपक्ष की तरफ से सरकार पर शराब को लेकर लगातार हमले भी किए जाते रहे हैं। ऐसे में जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़-बहुजन समाज पार्टी गठबंधन, आम आदमी पार्टी, जनता दल यूनाइटेड सहित अन्य छोटे दल शराबबंदी की बात कह रहे हैं।

ऐसे में सवाल है कि क्या छोटे दलों की इस पहल को देखकर बड़े दल भी इसको चुनावी मुद्दे में शामिल करेंगे। चुनाव में शराब को मुद्दा बनाना बड़ी बात है पर विडंबना है कि इस सिर्फ छोटे दल ही अपनी रणनीति में शामिल कर रहे हैं। कांग्रेस व भाजपा जैसे दल शराब के मुद्दे पर मौन साधे हुए हैं। शराब पर विभिन्न् दलों ने तीखी प्रतिक्रिया की है।

इनका कहना है

शराब ने छत्तीसगढ़ को अंदर से खोखला बना दिया है। यहां सरकार ने शराब का इस्तेमाल युवाओं को बर्बाद करने में इस कदर किया है कि आज का युवा रोजगार मांगने तक के लिए अपने को सक्षम नहीं पा रहा है। रमन सिंह की सरकार ने अपने छोड़े लाभ के लिए युवाओं को शराब के दलदल में धकेल दिया है।

-उचित शर्मा, आम आदमी पार्टी

बिहार की तर्ज पर छत्तीसगढ़ में भी शराबबंदी कर पार्टी एक सामाजिक परिवर्तन का मॉडल प्रस्तुत करेगी। शराब बंद करने का जो साहस बिहार में मुख्मंत्री नीतीश कुमार ने दिखाया, वह सामान्य बात नहीं है। छत्तीसगढ़ चुनाव में यही मुद्दा प्रमुख है।

-एमएम तिवारी, जदयू

शराब से राज्य की सामाजिक स्थिति, महिलाओं की स्थिति बहुत दयनीय हुई है। राज्य में शराबबंदी अब समय की मांग है। प्रदेश में सरकार बनी तो तत्काल छत्तीसगढ़ में पूर्ण शराब बंदी की जाएगी। शराबबंदी कर राज्य में सही मायने में महिलाओं की स्थिति सुदृढ़ की जा सकती है।

-नितिन भंसाली, जोगी कांग्रेस