रायपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान में 'एनर्जी कंजर्वेशन बिल्डिंग कोड' पर दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। क्रेडा रायपुर और वास्तुकला विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यशाला में बिल्डिंग के निर्माण पर महत्वपूर्ण जानकारी दी गई। 36 विद्यार्थियों और 8 प्रध्यापकों ने इसमें भाग लिया। कार्यशाला में एनर्जी कंजर्वेशन बिल्डिंग कोड 2017 पर इंदौर से आए एक्सपर्ट जेके व्यास ने बताया कि दो सरिया के बीच दो इंच की जगह बराबर रखी जाए तो बिल्डिंग को 100 वर्ष से अधिक तक सुरक्षित रखा जा सकता है। बिल्डिंग को का उपयोग केवल रहने के अलावा एनर्जी सेविंग और कंजर्वेशन के तौर पर भी किया जा सकता है। कार्यशाला में डॉ वंदना अग्रवाल और प्रो. विवेक अग्निहोत्री मौजूद रहे।

आयताकार में सरिया रहे तो नहीं होता कंपन

विशेषज्ञ व्यास ने बताया कि किसी भी भवन का निर्माण करते समय सरिया को आयताकार में रखना जरूरी है। इसका फायदा ये होता है किसी भी प्रकार का कंपन भवन में नहीं होता है। इससे दीवारें तो मजबूत रहती ही हैं, भवन भी पूरी तरह से सुरक्षित रहता है।

एनर्जी सेविंग के रूप में करें उपयोग

व्यास ने बताया कि घर हो या भवन, सभी का इस्तेमाल एनर्जी सेविंग के रूप में किया जा सकता है। सोलर पैनल इसका सबसे अच्छा ऑपशन है। के्रडा इसके लिए सब्सिडी भी दे रहा है। भवन की छत पर सोलर पैनल लगवा कर सौर एनर्जी का बखूबी इस्तेमाल कर सकते हैं।

भवन निर्माण के सभी मटेरिल को करें टेस्ट

बेहतर भवन निर्माण के लिए उसके सभी मटेरियल को टेस्ट करें। इसके लिए अब अच्छे सॉफ्टवेयर भी उपलब्ध हैं। इनके माध्यम से सरिया, ईंट, सीमेंट व अन्य सभी सामाग्री का टेस्ट कर सकते हैं। गुणवत्ता की जरा भी कमी लग रही है तो दूसरी जगह से सामग्री लें।