रायपुर। प्रदेश के उपभोक्ताओं में अपने अधिकार के प्रति जागरूकता बढ़ने लगी है। लोग 10 रुपए के स्टांप के सहारे अपने अधिकार की लड़ाई लड़ रहे हैं। उपभोक्ता संरक्षण आयोग में दैनिक जीवन से जुड़े कई तरह के प्रकरण सामने आ रहे हैं। राजधानी में फोरम स्थापित होने के बाद से अब तक 52 हजार लोगों ने आवेदन किया, जिनमें से 46 हजार लोगों के प्रकरणों का निपटारा भी किया जा चुका है।

उपभोक्ता अधिकार नियम का फायदा शहरवासी काफी उठा रहे हैं। इसकी शुरुआत 15 मार्च 1962 को हुई, जिससे खरीदी हुई वस्तु को लेकर भी लोगों को अधिकार मिला। इस बात को अमेरिकी संसद में राष्ट्रपति जॉन एफ कैंडली ने उठाया। उनकी कही बात विश्वस्तर पर चर्चा का विषय बनी। यूनाइटेड नेशन ने इन बातों को ध्यान में रखकर 15 मार्च 1985 को विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस घोषित किया।

नहीं भरी फीस, स्टूडेंट को मिला मुआवजा

बिलासपुर निवासी सार्थक मिर्री ने इंस्टिट्यूट आफ कंम्प्यूटर एकाउन्टेशन में सन 2012 में सीआईए व बीकॉम के लिए आवेदन किया। उसने अपने प्रकरण में बताया कि इंस्टिट्यूट के डायरेक्टर निवास चिरुकुपाल्ली ने उसके भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है। इंस्टिट्यूट ने उसकी बीकॉम की फीस ले ली, लेकिन एलपीयू यूनिवर्सिटी में रजिस्ट्रेशन नहीं कराया। मामले की आयोग ने सुनवाई की और छात्र सार्थक मिर्री के हक में फैसला सुनाया। फीस की राशि वर्तमान ब्याज दर पर लौटाने को कहा और पचास हजार रुपए मानसिक क्षतिपूर्ति के रूप में देना का आदेश दिया।

पुराने लैपटॉप की जगह मिला नया, साथ में 62 हजार रुपए भी

रायपुर निवासी गौरव शर्मा ने सोनी कंपनी का लैपटॉप लिया। एक वर्ष के भीतर ही लैपटॉप खराब हो जाने पर सोनी कंपनी के सर्विस सेंटर में दिखाया गया। वहां कहा गया कि लैपटॉप को बेंगलुरू भेजना पड़ेगा, लेकिन तीन माह गुजरने के बाद भी लैपटॉप नहीं दिया। इसके बाद उपभोक्ता फोरम में इसकी शिकायत दर्ज की गई। फोरम में सोनी कंपनी व सर्विस सेंटर के खिलाफ फैसला सुनाते हुए कहा कि उन्हें उतने ही रुपए का नया लैपटॉप व क्षतिपूर्ति के रूप में 62 हजार रुपए दें।

गद्दा हुआ खराब, मिले 23 हजार

महादेवघाट निवासी रजनी वर्मा ने ट्वेन्टी फर्स्ट टेक्नो प्रोडक्ट्स से फोम वाला गद्दा खरीदा। इसका मूल्य 16 हजार 400 रुपए थी। कुछ ही दिनों में गद्दे का फोम खराब होने लगा। इस पर उपभोक्ता फोरम में शिकायत की गई, फैसला सुनाते हुए फोरम ने 12 प्रतिशत ब्याज दर से 16 हजार 400 रुपए वापस करने का आदेश दिया। साथ ही मानहानि के लिए 3000 हजार रुपए अलग से दिलाए।