राजनांदगांव । राजनांदगांव से भाजपा प्रत्याशी संतोष पांडे ने बड़ी जीत दर्ज कर ली हैं। उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी भोलाराम साहू को 1 लाख 11 हजार से हराया है। भाजपा ने यहां से लगातार पांचवी बार जीत दर्ज की। परिणाम की आधिकारिक घोषणा के पहले वीवीपैट की परचियां गिनी जा रही है। उधर भाजपा का विजय जुलूस शहर में निकाल दिया गया है। बता दें कि, राजनांदगांव सीट पर भाजपा ने तीसरी बार कवर्धा से संतोष पांडेय के रूप में प्रत्याशी उतारा था। इसके पहले रमन सिंह और उनके पुत्र अभिषेक सिंह सांसद चुने गए हैं। दोनों कवर्धा के हैं। जीत के बाद संतोष पांडे ने क्षेत्र की समस्याओं को दूर करने और विकास की बात कही।

मोतीलाल वोरा (दो बार) और रामसहाय पांडेय को छोड़ बाकी सभी चुनावों में कांग्रेस संसदीय मुख्यालय से ही प्रत्याशी उतारती रही है, जबकि भाजपा ने एक बार (धरमपाल गुप्ता) बाहरी प्रत्याशी और बाकी 11 चुनावों में राजनांदगांव से उम्मीदवार चुनती रही है। इस बार दोनों प्रमुख प्रत्याशी संसदीय क्षेत्र के दोनों जिलों से मैदान में हैं। कवर्धा से कांग्रेस ने आज तक किसी को प्रत्याशी नहीं बनाया है।

राजनांदगांव संसदीय सीट में दो जिले राजनांदगांव व कवर्धा जिला शामिल है। इस संसदीय सीट का इतिहास भी रोचक रहा है। वर्ष 1998 में दुर्ग निवासी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मोतीलाल वोरा ने चुनाव जीता था, लेकिन 1999 में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। उनके पहले 1989 में भाजपा के दुर्ग निवासी धरमपाल गुप्ता ने जीत दर्ज की। हालांकि 1992 में हार गए। यहां सबसे बड़ा उलटफेर इंदिरा लहर में देखने को मिला था। मुंबई से आकर चुनाव लड़ने वाले कारोबारी रामसहाय पांडेय सांसद चुने गए थे।

लोकसभा क्षेत्र का अस्तित्व बनने के बाद अब तक हुए 15 चुनावों में 10 बार संसदीय मुख्यालय राजनांदगांव जिले से सांसद चुने गए। इसके बाद दो बार कवर्धा को मौका मिला है, जबकि तीन बार बाहरी प्रत्याशी ही सांसद चुने गए।

इंदिरा गांधी ने वर्ष 1971 में तत्कालीन सांसद पद्मावती सिंह का टिकट काटकर व्यवसायी मुंबई के रामसहाय पांडेय को मैदान में उतारा था। तब उन्होंने एनसीओ से चुनाव लड़ रहीं पद्मावती को 98 हजार 270 मतों से पराजित किया था। मगर 1977 में इंदिरा विरोधी लहर में रामसहाय को हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद संसदीय क्षेत्र से बाहर के दो और नेताओं को मैदान में उतारा गया और सफलता भी मिली। भाजपा ने 1989 में दुर्ग निवासी धरमपाल गुप्ता को टिकट दिया। इस चुनाव में उन्होंने दो बार के सांसद शिवेंद्र बहादुर सिंह को मात देकर दिल्ली पहुंचे। मगर 1992 में गुप्ता शिवेंद्र से हार गए।

कांग्रेस ने 1998 के चुनाव में दुर्ग निवासी मोतीलाल वोरा को चुनाव लड़ाया और शानदार जीत हासिल की, लेकिन सालभर हुए आम चुनाव में वोरा को डा. रमन सिंह के हाथों हार का सामना करना पड़ा। इस तरह कांग्रेस ने अब तक चार और भाजपा ने दो बार बाहरी प्रत्याशियों पर दांव लगाया है।

सर्वाधिक छह बार खैरागढ़ से चुने गए सांसद

राजनांदगांव के संसदीय इतिहास में सबसे ज्यादा छह सांसद खैरागढ़ से चुने गए हैं। खैरागढ़ राजपरिवार से ताल्लुक रखने वाले वीरेंद्र बहादुर सिंह ने पहला चुनाव वर्ष 1962 में जीता था। उनके बाद 1967 में पद्मावती देवी सांसद चुनीं गईं। फिर 1980, 1984 और 1992 में खैरागढ़ राजपरिवार से ही शिवेंद्र बहादुर सिंह लोकसभा पहुंचे। खैरागढ़ से छठवें सांसद देवव्रत सिंह हैं। उन्होंने वर्ष 2007 के उपचुनाव में जीत हासिल की थी। जिले के डोंगरगांव ब्लाक ने दो सांसद दिया है। वर्ष 1977 में सांसद चुने गए मदन तिवारी आसरा गांव के निवासी थे, जबकि 2004 में प्रदीप गांधी के रूप में डोंगरगांव ने दूसरा सांसद दिया था।

अब तक के सांसद

वर्ष सांसद निवासी

2014 अभिषेक सिंह कवर्धा

2007 देवव्रत सिंह खैरागढ़

2009 मधुसूदन यादव राजनांदगांव

2004 प्रदीप गांधी डोंगरगांव

1999 डॉ. रमन सिंह कवर्धा

1998 मोतीलाल वोरा दुर्ग

1996 अशोक शर्मा राजनांदगांव

1992 शिवेंद्र बहादुर खैरागढ़

1989 धरमपाल गुप्ता दुर्ग

1984 शिवेंद्र बहादुर खैरागढ़

1980 शिवेंद्र बहादुर खैरागढ़

1977 मदन तिवारी डोंगरगांव

1971 रामसहाय पांडेय मुंबई

1967 पद्मावती देवी खैरागढ़

1962 वीरेंद्र बहादुर खैरागढ़