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    कांग्रेस के 'कर्णधारों' में जिले से कोई नहीं

    Published: Sat, 13 Jan 2018 09:19 AM (IST) | Updated: Sat, 13 Jan 2018 09:19 AM (IST)
    By: Editorial Team

    राजनांदगांव। इसी साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर कांग्रेस में की गई 'सर्जिकल स्ट्राइक' में जिले का दबदबा गायब हो गया। चुनावी, प्लानिंग, प्रचार, घोषणा पत्र जैसे दो दर्जन से अधिक समितियां बनाई गई। इनमें पूर्व मंत्री धनेष पटिला को छोड़ किसी भी नेता का नाम नहीं है। इसके पहले प्रदेश कांग्रेस कमेटी में पांच बड़े नेता पदाधिकारी थे, लेकिन बाकी को भी इन महत्वपूर्ण कमेटियों से दूर ही रखा गया है। बड़ी बात यह है कि राजनांदगांव मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह का निर्वाचन जिला है। इसके बाद भी कांग्रेस की समितियों में यहां से किसी को नहीं लिया जाना, पार्टी की चुनावी तैयारियों को कमजोर कर सकता है।

    पिछले हफ्ते भूपेश बघेल को पीसीसी की फिर से कमान सौंपी गई। साथ ही दो दर्जन से अधिक ऐसी समितियां भी बनाई गई जिन पर विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की नैया पार करने की जिम्मेदारी होगी। इसमें आश्चर्य की बात यह है कि पटिला को छोड़ किसी भी नेता को एक भी कमेटी में जगह नहीं मिली। मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह का निर्वाचन जिला होने के साथ ही कांग्रेस के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष मोतीलाल वोरा के प्रभाव वाले जिले से किसी भी नेता का नाम पीसीसी की कमेटियों में नहीं होना कांग्रेस की चुनावी तैयारियों को कमजोर कर सकता है।

    अभा कांग्रेस में था दखल

    अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी में भी जिले की उपस्थिति हुआ करती थी। दिवंगत नेता इंदरचंद जैन अभा कांग्रेस के कोषाध्यक्ष हुआ करते थे। बाद में यहां से सांसद रहे मोतीलाल वोरा अब तक यह जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। इस बीच एक दर्जन नेता जिले से अभा और प्रदेश कांग्रेस में शामिल रहते थे। उन्हें हर तरह की समितियों में भी सम्मानजक स्थान मिला करता था, लेकिन स्थिति बदली लग रही है। पिछली पीसीसी में पटिला के अलावा देवव्रत सिंह, विधायक भोलाराम साहू, डा. आफताब आलम खान और नवाज खान भी पदाधिकारी थे। पटिला को प्लानिंग और प्रचार समिति में बतौर सदस्य शामिल किया गया है।

    कम हुआ जिले का दबदबा

    देवव्रत सिंह अभा कांग्रेस में प्रवक्ता थे। वे पहले पीसीसी में भी कई अहम पदों पर रह चुके थे। उनके इस्तीफे के बाद कांग्रेस संगठन में जिले का दबदबा कम हो गया है। इस कारण भी यहां से किसी वरिष्ठ नेता को चुनाव से जुड़ी समितियों में लेने की जरूरत महसूस की जा रही थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। हालांकि माना जा रहा है कि सांगठनिक फेरबदल के बाद जिले में भी कांग्रेस का समीकरण बदल सकता है। भूपेश बघेल के बाद डा. चरणदास महंत का वजन बढ़ाया गया है। ऐसे में नए चेहरों को मौका मिल सकता है।

    पटिला को अजा प्रकोष्ठ की कमान

    चार बार के विधायक व पूर्व मंत्री धनेष पटिला को कांग्रेस के अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है। वे एकमात्र ऐसे नेता हैं जिन्हें पहले प्रदेश स्तरीय कमेटियों में जगह दी गई और अब प्रकोष्ठ का प्रदेश अध्यक्ष भी बनाया गया है। उनके मनोनयन के बाद जिले में कांग्रेस में नए समीकरण की संभावना जताई जा रही है।

    विस्तार में देखेंगे

    सारी समितियां दिल्ली से बनाई गई है। सभी जिलों की सहभागिता तय की गई है। कम-ज्यादा वाली स्थिति को विस्तार के समय देखेंगे। कोशिश होगी कि सभी जिलों को समान महत्व मिले।

    -भूपेश बघेल, अध्यक्ष, प्रदेश कांग्रेस कमेटी

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