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    बैल तो मर गया, पशु चिकित्सक को दे गया झटका

    Published: Tue, 17 Apr 2018 07:50 AM (IST) | Updated: Tue, 17 Apr 2018 10:43 AM (IST)
    By: Editorial Team
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    राजनांदगांव। चौकी ब्लक के ग्राम निचेकोहड़ा में पशु चिकित्सक द्वारा पोस्टमार्टम नहीं किए जाने से बैल की मृत्यु पर बीमा क्लेम नहीं मिलने के मामले में कलेक्टर ने तत्कालीन पशु चिकित्सक डॉ. बीपी विश्वकर्मा की सैलरी से बैल की बीमा राशि काटने के निर्देश दिए हैं।

    ग्राम गौलीटोला में आयोजित समाधान शिविर में आये इस आवेदन के संबंध में कलेक्टर ने अपर कलेक्टर ओंकार यदु को जांच के निर्देश दिए थे। जाँच की रिपोर्ट आने पर कलेक्टर ने 30 हजार रुपए की राशि बीमित ग्रामीण को डाक्टर की सैलरी से दिलाने अधिकारियों को आदेशित किया।

    उन्होंने कहा कि पशु चिकित्सक की लापरवाही से किसान को दो साल तक भटकना पड़ा, इसकी पूरी जिम्मेदारी पशु चिकित्सक की बनती है कि वो किसान को हुए नुकसान की भरपाई करे।

    ग्राम निचेकोहड़ा के श्रीराम ने दो बैल खरीदे थे। इसमें श्रीराम का एक बैल बीमारी की वजह से 11 अगस्त 2016 को मर गया। श्रीराम ने ओरियंटल इंश्योरेंस कंपनी के पास इन बैलों का बीमा कराया था और बीमा की राशि तीस हजार रुपए थी।

    बैल की मृत्यु की सूचना श्रीराम ने तत्कालीन पशुचिकित्सक को दी लेकिन श्रीराम के मुताबिक पशुचिकित्सक ने इसका पोस्टमार्टम नहीं किया। जब श्रीराम बीमा कंपनी के दफ्तर पहुँचे तो उनसे पोस्टमार्टम की कपी माँगी गई लेकिन यह श्रीराम के पास उपलब्ध नहीं थी।

    बीमा कंपनी के अधिकारियों ने बताया कि आवेदन की प्रोसेसिंग तभी होती है जब पोस्टमार्टम की कपी मिलती है। इसके बगैर क्लेम की कार्रवाई आगे नहीं बढ़ाई जा सकती। राहत नहीं मिलने पर उन्होंने लोक सुराज में आवेदन किया।

    कलेक्टर जिस दिन समाधान शिविर पहुँचे। उस दिन इस आवेदन की भी बारी आई। कलेक्टर ने पशु चिकित्सक से पोस्टमार्टम नहीं करने का कारण पूछा तो उन्होंने बताया कि बैल की लाश मौके पर मौजूद नहीं थी। इसलिए पोस्टमार्टम नहीं किया जा सका।

    तुरंत दे दी थी सूचना

    किसान ने बताया कि उसने बैल की मृत्यु के तुरंत बाद इसकी सूचना चिकित्सक को दी। प्रकरण के सामने आने पर शिविर में मौजूद ग्रामीणों ने कहा कि अन्य मौकों पर भी पशुचिकित्सक की कार्यप्रणाली लापरवाही से भरी रही है।

    इस पर कलेक्टर ने नाराजगी जाहिर करते हुए किसान को राहत दिलाने मामले की जाँच के निर्देश दिए थे। जाँच रिपोर्ट के पश्चात कलेक्टर ने इस मामले में पशुचिकित्सक की लापरवाही पाई और किसान को मिलने वाली बीमा राशि को पशुचिकित्सक को वहन करने के निर्देश दिये तथा यह राशि इनकी सैलरी से काटने अधिकारियों को निर्देशित किया।

    नईदुनिया ने उठाया था मुद्दा

    मामले को नईदुनिया ने प्रमुखता से उठाया था। समाधान शिविर में किसान ने अपनी पीड़ा कलेक्टर को बताई थी। पीएम के बिना उन्हें किसी तरह से बीमा दावा के लिए भटकना पड़ा, इस पर प्रमुखता के साथ खबर प्रकाशित की गई थी। प्रशासन ने उसके बाद इस मामले को और गंभीरता से लिया और जांच रिपोर्ट मिलते ही जिम्मेदार पशु चिकित्सक के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश जारी कर दिए गए।

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