कोरबा। नईदुनिया प्रतिनिधि

नहाय खाय के साथ रविवार को छठ पर्व की शुरुआत हो रही है। सोमवार को खरना के बाद मंगलवार को भगवान सूर्य को पहला अर्घ्य दिया जाएगा। उपासना पूजा की तैयारी जोरों पर है। पर्व को जितनी शुद्धता व शुचिता से मनाए जाने की परंपरा है, उसके विपरीत अर्घ्य दिए जाने वाले घाटों की बदहाली देखी जा रही है। शहर से होकर निकलने वाली नदी नालों में राखड़ की गंदगी देखी जा रही है। खासतौर पर श्रद्धालुओं को ढेंगुरनाला छठ घाट में राखड़ पानी से सूर्य को अर्घ्य देना पड़ेगा।

काली पूजा के छठवें दिन मनाया जाने वाला छठ पर्व को लेकर पूर्वांचलवासियों में उत्साह देखा जा रहा है। हजारों श्रद्धालुओं के आस्था का केंद्र होने के बाद घाटों में अव्यवस्था की स्थिति देखी जा रही है। मान्यता के अनुसार त्योहार में शुचिता का विशेष महत्व होता है। ढेंगुरनाला में प्रतिवर्ष हजारों की तादात में व्रती श्रद्धालु सूर्य को अर्घ्य देने के लिए एकत्र होते हैं। गंदगी के साथ राखड़ पानी का बहाव जारी रहने से अस्वच्छता के आलम में ही सूर्य को अर्घ्य देना व्रती श्रद्धालुओं की मजबूरी है। यह गंदगी केवल ढेंगुरनाला ही नहीं बल्कि हसदेव नदी के अलग-अलग घाटों में भी देखी जा सकती हैं। नदी, नाले व पोखरियों में पसर रही गंदगी के चलते अब लोग घर में ही अर्घ्य देना शुरू कर दिए हैं। लोगों का मानना है नदी तलाबों में पसरी गंदगी की बजाय घर में अर्घ्य देना उचित है। रविवार को नहाय खाय से यह पर्व आरंभ हो रहा है। इस आयोजन में श्रद्धालु सरोवर में स्नान कर सादा भोजन करते हैं। सोमवार को खरना मनाया जाएगा, जिसमें दिनभर उपवास रखकर ठेकुआ प्रसाद बनाने की परंपरा है। मंगलवार को पूरे दिन उपवास रखकर श्रद्धालु शाम के समय डूबते सूर्य को अर्घ्य देंगे। अर्घ्य देने के लिए सर्वमंगला घाट, अयप्पा मंदिर परिसर, मानिकपुर पोखरी, मुड़ादाई तालाब, तुलसी नगर नहरघाट, हसदेव दर्री बांध सहित विभिन्न स्थानों में श्रद्धालुओं की भीड़ रहेगी। शहरी क्षेत्र के अलावा उपनगरीय क्षेत्र बांकीमोंगरा, दीपका, हरदीबाजार, बाल्को, जमनीपाली, दर्री, कुसमुंडा आदि क्षेत्रों में छठ पूजा को लेकर उत्साह देखा जा रहा है।

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अरवा चावल व लौकी का महत्व

नहाय खाय में विशेष तौर पर भोजन में अरवा चावल के साथ लौकी व चना की सब्जी बनाने की परंपरा है। दूसरी सुबह सोमवार को खरना होगा। यह पर्व का वह पड़ाव है जिसमें व्रती महिलाएं पूरे दिन उपवास रख कर शाम को खीर व खरना प्रसाद बनाती हैं। खरना प्रसाद बनाने के लिए तैयारियां शुरू हो गई है। खरना प्रसाद का वितरण करने के पश्चात व्रती महिलाएं स्वयं प्रसाद ग्रहण करती हैं।

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पूजन सामग्री से बाजार में रौनक

बाजार में पूजा सामानों की आवक होने लगी है। व्रती श्रद्धालु सामानों की खरीदी के लिए बाजार में पहुंच रहे है। पर्व के लिए अभी तक गन्ने की आवक बाजार में नहीं हो सकी है। कयास लगाया जा रहा है कि सोमवार से बाजार में गन्ने की बिक्री शुरू हो जाएगी। चार दिन तक चलने वाले पर्व में सूपा कोसी भरने के लिए टोकरी आदि सामानों की खरीदी की जा रही है।

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क्या है मान्यता

पर्व के पीछे मान्यता यह है कि छठ माता सूर्य की बहन है जिसकी उपासना से परिवार में सुख समृद्धि की बढ़ोतरी होती है। सूर्य उपासना के साथ छठ मैया की पूजा करने से हर मनोकामना पूरी होती है। कोसी भर कर छठ मैया को अर्घ्य देने से हर एक मन्नत पूरी होती है। खासकर संतान सुख से वंचित महिलाओं के लिए यह पर्व अत्यंत पᆬलदायी है।