रायपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। परिवार और घर को बसाने वाली माता, बहनें और महिलाएं अब भी पुरुषों का विश्वास हासिल नहीं कर पाई हैं। प्रदेश में महिलाओं के नाम पर संपत्ति पंजीकृत कराने पर छूट, नारी शक्ति, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ जैसी तरह-तरह की योजनाओं के बाद भी अब तक सिर्फ 13 फीसद महिलाओं को ही जमीन जायदाद में मालिकाना हक मिल पाया है।

पुरुष अभी भी 87 प्रतिशत की हिस्सेदारी लेकर पुरूष प्रधानता की ओर इशारा कर रहे हैं। केंद्र सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय के राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस-4) में यह जानकारी सामने आई है। एक ओर प्रदेश को महिला बहुल माना जाता है, दूसरी ओर सम्पत्ति के अधिकार में उनकी उपस्थिति कम है। बरहाल प्रदेश में पिछले दो सालों में दस प्रतिशत की महिलाओं के नाम जमीनों और मकानों के पंजीयन की वृद्घि सर्वेक्षण में बताई गई है।

इन राज्यों में हुआ सर्वेक्षण

सर्वेक्षण में छत्तीसगढ़, हरियाणा, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना, सिक्किम, मध्य प्रदेश, बिहार, गोआ, मेघालय, तमिलनाडु, उत्तराखंड, त्रिपुरा और दो केंद्र शासित प्रदेश शामिल किए गए। इसमें महिला सशक्तिकरण में काफी हद तक सुधार पाया गया। सभी राज्यों को मिलाकर 40 प्रतिशत महिलाओं के पास या तो संपत्ति है या परिवार की संपत्ति में उनका हिस्सा है। इन राज्यों में किए गए सर्वेक्षण में यह भी सामने आया कि अपनी संपत्ति की मालकिन होने के साथ-साथ महिलाओं के पास अपने पति की संपत्ति में भी हिस्सा है। इतना ही नहीं, कुछ राज्यों में संपत्ति पर महिलाओं के मालिकाना हक पर खासा सुधार देखा गया है।

ये राज्य हैं प्रदेश से आगे

सर्वेक्षण में सबसे आगे बिहार है, जहां 58 प्रतिशत से ज्यादा महिलाओं के पास संपत्ति का अधिकार है। उत्तर पूर्व के त्रिपुरा और मेघालय में यह आंकड़ा 57 प्रतिशत से ज्यादा है। कर्नाटक और तेलंगाना में क्रमशः 51 व 50 प्रतिशत से ज्यादा महिलाएं जमीन की मालकिन हैं। ये पांचों राज्य छत्तीसगढ़ से बेहतर स्थिति में हैं।