रायपुर/ कांकेर। अभी तक आपने अस्पतालों में नवजात शिशुओं की अदला-बदली के बारे में खूब सुना होगा, शवों की अदलाबदली की नहीं, लेकिन राजधानी के एक अस्पताल यह मामला सामने आया है। पंडरी स्थित एक निजी हास्पिटल में शनि-रविवार की रात झारखंड निवासी रिजवाना परवीन और कांकेर, तुएगहन निवासी लता दर्रो की मौत हुई। गार्ड ने हिंदू परिवार को शव सौंपते वक्त चेहरा नहीं दिखाया, न ही परिजनों ने देखने की मांग की।

इस एक चूक से रिजवाना का शव रायपुर से 160 किमी दूर कांकेर तुएगहन पहुंच गया। दूसरी ओर रविवार की सुबह 8 बजे मुस्लिम परिवार रिजवाना का शव लेने के लिए अस्पताल पहुंचा। गार्ड ने शव का चेहरा दिखाया तो परिजन सकते में आ गए। बोले- ये शव रिजवाना का नहीं है। फिर क्या था अस्पताल में हड़कंप मच गया। बात प्रबंधन तक पहुंची, तब तक कांकेर से अस्पताल फोन आ गया कि जो शव उन्हें दिया गया है, वह लता का नहीं है। इस घटना से हड़बड़ाए अस्पताल प्रबंधन ने जैसे-तैसे दोनों परिवारों को समझाकर शांत किया। एंबुलेंस कांकेर रवाना की गई, ताकि वहां से रिजवाना का शव लाया जाए और लता का शव उनके परिजनों को सौंपा जाए। करीब चार घंटे में मामला सुलझा तब अस्पताल प्रबंधन ने राहत की सांस ली।

क्या कहते हैं परिजन -

रसीद, मृतका रिजवाना का भाई -

रिजवाना हृदय रोग से पीड़ित थी, दो दिन पहले ऑपरेशन हुआ था। उम्मीद थी कि वह बच जाएगी, लेकिन खुदा को कुछ और ही मंजूर था। कभी किसी के साथ शव की अदला-बदली की घटना न हो, क्योंकि यह दुख की घड़ी में सदमे जैसा होता है।

रवींद्र, मृतका लता के पति -

प्रसव के दौरान लता की मौत हुई, बच्चा सुरक्षित है। अस्पताल से कपड़े में लिपटा हुआ शव मिला, खोलकर देखने का वक्त कहां था। पूरा परिवार राह देख रहा था। हॉस्पिटल के संचालक का कहना है कि शव बदल गए थे, इसकी पूरी जानकारी ली जा रही है। आखिर यह कैसे हुआ। सोमवार को स्टाफ से बात की जाएगी, ऐसा होना नहीं चाहिए, क्योंकि इसका अपना प्रोटोकॉल है। परिजनों को मृतक का चेहरा दिखाकर ही शव देने का नियम है। भविष्य में इस नियम का पालन हर हाल में करवाया जाएगा।

क्या कहता है मेडिकल प्रोटोकाल -

अस्पताल में किसी भी व्यक्ति की मृत्यु के पश्चात परिजनों को शव देने से पहले चेहरा खोलकर दिखाना है। मृतक के ओपीडी और आइपीडी नंबर का दस्तावेज से मिलान किया जाना है, सिक्योरिटी गार्ड द्वारा इन तमाम प्रोटोकॉल के बाद एक्जिट रजिस्टर में शव सौंपने के समय हस्ताक्षर लेना अनिवार्य है। इन्हीं प्रोटोकॉल का पालन करने में लापरवाही बरती गई।