कोरबा। नईदुनिया प्रतिनिधि

सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता में निखार लाने अब एक नई पहल शुरू की गई है। इन दिनों मूल रूप से शिक्षक के रूप में पदस्थ होकर अब संकुल में दायित्व निभा रहे शैक्षिक समन्वयकों (सीएसी) के लिए स्पेशल ब्रेन स्टॉर्म सेशन आयोजित की जा रही है। इन कक्षाओं में उन्हें यह याद दिलाया जा रहा है कि लगभग दो दशक पहले आखिर स्त्रोत समन्वयक के पद की रचना करने का उद्देश्य क्या था। विशेषज्ञों की मदद से उन्हें उनके मूल कर्तव्यों का पुनः ज्ञान उपलब्ध कराते हुए स्कूलों की दशा सुधारने में बेहतर इस्तेमाल की सीख प्रदान की जा रही।

प्राथमिक व मिडिल स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता निखारने संकुल शैक्षिक समन्वयकों को अब उन्मुखीकरण कार्यक्रम से जोड़ा जा रहा है। इन विशेष सेशन कक्षाओं में अपने मूल दायित्व निभाने के साथ वे स्कूल में बच्चों की कक्षा लेकर समय-समय पर शिक्षा की गुणवत्ता का आंकलन करने की सीख दी जा रही है। उन्हें किन बिंदुओं पर फोकस करते हुए कार्य करना है, इस पर बारी-बारी विशेष सत्र लिया जा रहा। मूल कार्यों के साथ अन्य अतिरिक्त जिम्मेदारियों के फेर में फंसने की बजाय बच्चों के लिए शिक्षा के बेहतर इंतजाम पर जोर देते हुए कार्य करने पर जोर दिया जा रहा है। इसके अलावा स्कूलों में पिछले तीन साल से चल रहे डॉ. कलाम गुणवत्ता अभियान का दायरा बढ़ाते हुए कुछ नए प्रयोग की तैयारी की गई है। इनमें स्कूलों में बेहतर शिक्षा, व्यवस्था व गुणवत्ता की दिशा में प्रयास करने गठित की गई अतिरिक्त गविविधियां संचालित करने वाली समितियों के क्रियान्वयन पर समन्वयकों को विशेष फोकस पर भी जोर दिया जा रहा है। इसके माध्यम से शिक्षा की गुणवत्ता, खेल, स्काउट, पर्यावरण, संस्कार एवं नैतिक शिक्षा समेत अन्य विषयों पर फोकस करते हुए यह समितियां कार्य करेंगी।

इन अहम बिंदुओं पर दिया जोर

इस कार्यक्रम में डाइट कोरबा के पीसी पटेल व रामहरि सराफ ने सीखने का प्रतिफल, व्याख्याता जीएस डिक्सेना व संजय जैन ने सतत एवं व्यापक मूल्यांकन, प्राचार्य डॉ. फरहाना अली व कामता प्रसाद जायसवाल ने बच्चों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए शिक्षण पद्धति व उसकी आवश्यकता से जुड़े विषय के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी प्रदान की। व्याख्याता हेमंत माहुलिकर व जेएस मानसर ने प्रासंगिक विधि से अध्यापन करने के लिए अनेक उदाहरणों के माध्यम से संकुल शैक्षिक समन्वयकों को मार्गदर्शन प्रदान किया।

पिछले माह की खामियों की समीक्षा

इन दिनों सकुल शैक्षिक समन्वयकों को एक-दूसरे के क्षेत्र में संचालित स्कूलों में पहुंचकर सर्वेक्षण करने का दायित्व दिया गया है। शिक्षा विभाग की ओर से निर्धारित कुल 100 बिंदु में यह सर्वे किया जा रहा है। इस उन्मुखीकरण कार्यक्रम के दौरान पिछले माह की कमियों व खामियों को चिन्हांकित कर उनके निराकरण की युक्ति पर भी फोकस करना जरूरी बताया गया। इस तरह स्कूल की हर व्यवस्था को सतत बेहतर करने मदद मिल सकेगी। पिछले माह की चिन्हांकित खामियों का निराकरण कर आगामी माह में शैक्षिक कार्ययोजना के संपादन पर चर्चा की गई।

118 संकुल के सीएसी शामिल

डीईओ सतीश पांडेय के मार्गदर्शन पर जिले के 118 संकुल शैक्षिक समन्वयक (सीएसी) का उन्मुखीकरण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्राथमिक एवं माध्यमिक स्तर के विद्यालयों में इन समन्वयकों का महत्वपूर्ण योगदान होता है। जिले में 1074 शासकीय प्राथमिक एवं 525 शासकीय माध्यमिक स्कूल संचालित किए जा रहे हैं। इन समन्वयकों की ओर से शैक्षिक गुणवत्ता लाने के लिए किए जाने वाले प्रतिदिन के निरीक्षण कार्य में जिन प्रमुख बिंदुओं पर ध्यान दिया जाना चाहिए, उन्हें चिन्हांकित करते हुए उन्मुखीकरण किया जा रहा है।

बाक्स

फैक्ट फाइल

0 कुल स्कूल1599

0 प्राथमिक1074

0 माध्यमिक525

0 समन्वयक118

0 सर्वे के बिंदु100

संकुल शैक्षिक समन्वयकों के लिए उन्मुखीकरण कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें उनके मूल कार्यों पर चर्चा होती है। वे क्या हैं, उनका उद्देश्य क्या है और कैसे उन दायित्वों का निर्वहन करना चाहिए, जो उन्हें दिए गए हैं। उन्हें बताया गया कि लर्निंग आउटकम के माध्यम से स्कूल अवलोकन कैसे करना चाहिए। समन्वयकों को यू-डाइस पर वेरिफिकेशन करने की प्रक्रिया की जानकारी भी प्रदान की गई। इन सब बातों को लेकर ब्रेन स्टार्मिंग सेशन रखा गया था, ताकि शिक्षा की गुणवत्ता में उनकी अहम भूमिका में निखार लाते हुए बेहतर योगदान के रास्ते प्रशस्त हो सके।

- सतीश पांडेय, डीईओ