कोरबा, नईदुनिया न्यूज। अब तक देखा जा रहा था कि शौचालय नहीं, वहां बेटियां बहू बनकर जाने व आने को तैयार नहीं है। एक ऐसा मामला भी सामने आया है, जिसमें बेटियों को विदा करने के बाद पिता की आंखें बेटियों के इंतजार में पथरा गई है। पिता ने जब मोबाइल से संपर्क कर विवाहित बेटियों से कुशलक्षेम पूछने के बाद मायके आने की बात कही, तो बेटियों ने कहा- पहले शौचालय बनवा दो फिर मुझे बुलाना अब्बू।

यह माजरा रजगामार के वार्ड क्रमांक नौ प्रेमनगर का है। यहां रहने वाले मोहम्मद इस्माइल शेख की दो बेटियां है पहली सलमा और दूसरी सफीना। इस्माइल ने सामाजिक रीति रिवाज के साथ अपनी दोनों पुत्रियों का निकाह किया था। शादी के कई वर्ष बाद भी जब बेटियां अपने मायके नहीं आई, तो परिवार के लोगों को चिंता सताने लगी। इस्माइल ने जब बेटियों को मायके आने के लिए कहा तो उन्होंने मायके आने से इनकार कर दिया। उनका कहना था कि घर में शौचालय नहीं है, इसलिए हम मायके नहीं आ सकते। मायके आने के बाद हमें पहले की तरह खुले में शौच के लिए जाना पड़ेगा, जो हमें कतई मंजूर नहीं।

बेटियों का जवाब सुनकर माता-पिता की आंखों से आंसू छलक उठे। दरअसल इस्माइल के घर में ग्राम पंचायत की ओर से दो साल पहले शौचालय निर्माण का काम शुरू किया गया था, जो आज तक पूर्ण नहीं हो सका है। अधूरे निर्माण कार्य से परिवार के सदस्य खुले में शौच पर जाने के लिए मजबूर हैं। बेटियों का कहना है कि शौचालय नहीं होने से खुले में शौच के लिए जाने पर शर्मिंदगी उठानी पड़ती है।

साथ ही इसका दुष्प्रभाव मनुष्य के जीवन पर पड़ता है। केंद्र सरकार ने स्वच्छ भारत मिशन के तहत प्रत्येक घर में शौचालय निर्माण कराया जाना सुनिश्चित किया है। शौचालय का निर्माण शुरू किया गया, लेकिन निर्माण कार्य अधूरा छोड़ दिया गया है। शौचालय नहीं होने से बेटियां मायके आने से कतरा रही हैं। मो. इस्माइल ने कलेक्टर मो. कैसर अब्दुल हक से अधूरे शौचालय को पूर्ण कराने की मांग की है।

ये कैसा ओडीएफ सम्मान

यूं तो जिले को ओडीएफ घोषित किए 11 महीने हो गए हैं, लेकिन अभी भी अधूरे शौचालय निर्माण के मामले सामने आ रहे। न केवल ग्रामीण इलाकों में हालत बदतर है, बल्कि शहरी इलाकों का भी कमोवेश यही हाल है। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग छत्तीसगढ़ ने नगर पालिक निगम कोरबा को खुले में शौचमुक्त घोषित कर दिया है।

इसके लिए रायपुर में दो मई को आयोजित एक कार्यक्रम में सरकार की ओर से खुले में शौचमुक्त के लिए प्रशस्ति पत्र प्रदान कर जिले के अफसरों को सम्मानित किया, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और बयां कर रही है। निगम क्षेत्र के कई वार्ड में आज भी खुले में शौच की मजबूरी बनी हुई है। सैकड़ों शौचालय आज भी अधूरे हैं। कई ऐसे लोग हैं जिनके घरों में शौचालय के नाम पर नींव तक नहीं खोदी गई है।