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    धान की बेकार पड़ी मेड़ों पर स्ट्राबेरी की खेती

    Published: Thu, 15 Feb 2018 11:22 PM (IST) | Updated: Thu, 15 Feb 2018 11:22 PM (IST)
    By: Editorial Team
    15febambp7 15 02 2018

    0 कृषि विज्ञान केंद्र सरगुजा की पहल, किसानों में जगी नई उम्मीद

    0 किसानों की आय दोगुनी करने सहायक साबित होगी स्ट्राबेरी की खेती

    0 आकर्षित हुए किसान तो कृषि विज्ञान केंद्र से मिलेगी पूरी मदद

    अंबिकापुर । नईदुनिया प्रतिनिधि

    जिले की जलवायु व मिट्टी स्ट्राबेरी की खेती के लिए उपयुक्त है। कृषि विज्ञान केंद्र अजिरमा ने इसका सफल प्रयोग पूरा कर लिया है। ठंड व हल्के गर्म मौसम की स्ट्राबेरी की खेती धान के मेड़ों में कर बेहतर पैदावार भी प्राप्त कर ली गई है। कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा अब स्ट्राबेरी की खेती को किसानों के खेतों तक ले जाने का प्रयास भी शुरू कर दिया गया है। कृषि विज्ञान केंद्र के सफल प्रयोग के बाद सरगुजा के किसान स्ट्राबेरी की खेती कर बेहतर आय अर्जित कर सकते हैं।

    किसानों की आय दोगुनी करने उन्हें आय उपार्जक दूसरी गतिविधियों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। सरगुजा, सूरजपुर व बलरामपुर जिले में प्रशासन द्वारा किसानों की आय में वृद्घि के लिए किए जा रहे प्रयासों के बीच कृषि विज्ञान केंद्र का यह प्रयोग नई उम्मीद लेकर आया है। सरगुजा जिले में खेती की एक-एक इंच जमीन की उपयोगिता को ध्यान में रखकर कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा मेड़ों की उपयोगिता साबित करने का भी प्रयास शुरू हुआ है। वह भी व्यवसायिक फसल स्ट्राबेरी की खेती कर। मांग अधिक और उत्पादन कम होने के कारण यह फल उंचे दर पर बिकता है। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के अंतर्गत कृषि विज्ञान केंद्र सरगुजा द्वारा व्यावसायिक फसल स्ट्राबेरी की खेती धान के मेड़ों में करके बेकार पड़े भूमि के उपयोग की तकनीक विकसित की है। यहां के किसान इसकी व्यवसायिक खेती कर भरपूर आमदनी कमा सकते है। इसे दृष्टिगत रखते हुए कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने सिंचित अवस्था में धान के बेकार पड़े मेड़ों का भरपूर उपयोग करते हुए उच्च तकनीक द्वारा स्ट्राबेरी की किस्म केमारोजा की वैज्ञानिक खेती का तरीका खोज निकाला है, जिसमें ड्रीप सिंचाई एवं पली मल्चिंग का उपयोग किया गया है।

    16 से 27 डिग्री तापमान पर खेती

    कृषि विज्ञान केंद्र के कार्यक्रम समन्वयक डा. आर तिग्गा ने बताया कि स्ट्राबेरी ठंडे एवं हलके गर्म मौसम की फसल है और इसकी खेती ठंड के मौसम में 16 से 27 डिग्री सेंटीग्रेड तापमान वाले मौसम में सामान्य खेतों में सफलता पूर्वक की जा सकती है। सरगुजा जिले में उक्त तापमान लंबी अवधि तक रहता है। धान की खेतों की मेड़ भी खाली रहती है। बेकार पड़ी जमीन पर स्ट्राबेरी की खेती कर किसान बेहतर आय अर्जित कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि सरगुजा जिले की जलवायु एवं मिट्टी दोनों ही स्ट्राबेरी की खेती के लिए उपयुक्त है।

    फल भी हैं मीठे

    सरगुजा जिले में अबतक व्यवसायिक रूप से स्ट्राबेरी की खेती नहीं की जा रही थी। चंद किसानों द्वारा प्रयोग बतौर इसकी खेती की जा रही थी, लेकिन कृषि विज्ञान केंद्र के प्रयास से व्यवसायिक रूप से भी इसकी खेती को बल मिलेगा, क्योंकि कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों के देखरेख में हुई खेती में स्ट्राबेरी फसल से न केवल अच्छी पैदावार मिल रही है, बल्कि अच्छी गुणवत्ता वाले मीठे फल प्राप्त हो रहे है, जिसे अच्छे दामों में स्थानीय बाजार में विक्रय किया जा रहा है। फसल विविधिकरण के अंतर्गत यह तकनीक जिले के किसानों को बेकार पड़ी भूमि से अतिरिक्त आमदनी अर्जित करने में मददगार साबित होगी और यह तकनीक किसानों को व्यवसायिक खेती की ओर आकर्षित करेगा।

    सरगुजा की जलवायु व मिट्टी स्ट्राबेरी की खेती के अनुकूल है। धान की बेकार पड़ी मेड़ों पर इसकी खेती का सफल प्रयोग किया जा चुका है। किसान स्ट्राबेरी की खेती कर बेहतर आय अर्जित कर सकते हैं।

    डा. आर तिग्गा

    समन्वयक, कृषि विज्ञान केंद्र

    और जानें :  # Strawberry farming
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