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    मशरुम की इस प्रजाति को लगाएंगे तो मालामाल हो जाएंगे किसान

    Published: Thu, 15 Feb 2018 11:34 PM (IST) | Updated: Fri, 16 Feb 2018 11:37 AM (IST)
    By: Editorial Team
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    अंबिकापुर । मशरुम उत्पादन में सरगुजा जिले ने पूरे राज्य में अब अपनी विशेष पहचान बना ली है। इसी बीच कलेक्टोरेट स्थित जैव प्रयोगशाला में पहली बार प्रोटीन और मिनरल से भरपूर आयस्टर मशरुम की नई प्रजाति ब्लू आयस्टर जिसे ब्लू एक्स या लैगी मशरुम के नाम से भी जाना जाता है के उत्पादन में सफलता पाई है।

    इस नई ब्लू एक्स प्रजाति के मशरुम को डायरेक्ट्रेट ऑफ मशरुम रिसर्च सोलन हिमाचल प्रदेश से जिले के मौसम के आधार पर ब्लू आयस्टर के मदर कल्चर लाकर स्थानीय बायोटेक लैब में स्पॉन तैयार कर ब्लू एक्स का सफल उत्पादन किया गया है। इसके बाद शहर में ही कई महिलाओं ने अपने घर में भी इसका उत्पादन शुरु कर दिया है जो अन्य प्रजाति के मशरुम से कहीं अधिक उत्पादन दे रहा है।

    जिले की जलवायु मशरुम उत्पादन के लिए काफी बेहतर मानी जाती है। यही कारण है कि यहां बड़ी संख्या में शहरी व ग्रामीण बेरोजगारों ने इसे रोजगार का माध्यम बनाना शुरु किया और आय अर्जित करने का बड़ा जरिया मिल चुका है।

    मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना के तहत मशरुम उत्पादन का प्रशिक्षण स्थानीय कलेक्टोरेट स्थित बायोटेक लैब में कलेक्टर किरण कौशल की मार्गदर्शन में युवा वैज्ञानिक डॉ. प्रशांत शर्मा व उद्यान विभाग के अधिकारी मिलकर दे रहे हैं।

    अब तक आयस्टर मशरुम के प्लूरोटस साजोरकाजू, प्लूरोटस फ्लोरिडा इंद्रा-श्वेता एवं प्लूरोटस फ्लेबीलेटस प्रजाति के ही मशरुम की खेती संभव हो सकी थी। कलेक्टर किरण कौशल ने जुलाई माह में जैव प्रयोगशाला के वैज्ञानिक डॉ. प्रशांत शर्मा को एवं उद्यानिकी विभाग के अधिकारी टीआर बुनकर को मशरुम उत्पादन को और बढ़ावा देने के उद्देश्य से मशरुम रिसर्च सेंटर सोलन हिमाचल प्रदेश भेजा।

    वहां के मौसम के आधार पर ब्लू आयस्टर के मदर कल्चर यहां लाया गया और बायोटेक लैब में बीज स्पॉन तैयार कर ब्लू आयस्टर जिसे ब्लू एक्स कहा जाता है तैयार किया गया। इस नई प्रजाति के सफल उत्पादन के बाद बायोटेक लैब से बाहर निकाल शहर व जिले के अलग-अलग हितग्राहियों के घर में लगवाया गया।

    पहले ही चरण में ब्लू एक्स मशरुम का बेहतर उत्पादन होने लगा है। अब तक जितनी किस्में यहां लगाई गई उनमें सर्वश्रेष्ठ किस्म ब्लू एक्स साबित हुई है। राज्य में सरगुजा जिले में अलग पहचान मशरुम उत्पादन में बना ली है।

    पिछले दिनों प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने भी सरगुजा कलेक्टर किरण कौशल के साथ युवा वैज्ञानिक डॉ. प्रशांत शर्मा के इस पहल पर पीठ थपथपाई थी। मुख्यमंत्री ने बकायदे साजोर काजू किस्म का मशरुम पैकेट खरीदा था। मुख्यमंत्री ने जिले में कौशल विकास योजना के तहत मशरुम उत्पादन को और बढ़ावा देने कहा था। इस बीच इस नए मशरुम की किस्म ने जिले को एक कदम और बढ़ा दिया है।

    कई गुणों से भरपूर है ब्लू एक्स मशरुम-

    युवा वैज्ञानिक डॉ. प्रशांत शर्मा ने बताया कि ब्लू आयस्टर मशरुम में प्रोटीन की अधिक मात्रा के कारण यह शाकाहारी भोज्य लेने वालों के लिए प्रोटीन का एक बेहतर विकल्प है। इसमें वसा की कम मात्रा होने के कारण यह शुगर के मरीजों के लिए उत्तम आहार माना जाता है।

    ब्लू आयस्टर मशरुम में विटामिन डी, विटामिन बी-3, विटामिन बी-2, विटामिन बी-5 एवं विटामिन बी-9 प्रचूर मात्रा में पाया जाता है। इसके अतिरिक्त इस मशरुम में कॉपर और ट्रिप्टोफेन पर्याप्त मात्रा में ब्लड शुगर को नियंत्रित करने के साथ इसके उपयोग से इम्युनिटी सिस्टम को मजबूत करने, त्वचा रोग को ठीक करने, एनिमिया को नियंत्रित करने व दिमागी संतुलन को बनाए रखने में कारगर साबित होता है।

    इन महिलाओं ने पहली बार किया उत्पादन-

    स्थानीय जैव प्रयोगशाला में ब्लू एक्स मशरुम के सफल अनुसंधान के बाद मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना के तहत नगर के नवापारा में रहने वाली सुमति मिश्रा व बटवाही गांव की बबीता अगरिया ने पहली बार अपने घर में ब्लू एक्स का उत्पादन किया जो अन्य किस्मों से कहीं बेहतर साबित हुआ। शहर की सुमति मिश्रा तो ब्लू एक्स मशरुम का उत्पादन देख काफी उत्साहित हैं। उसने अच्छी आय पहले चरण में ही अर्जित की है।

    वर्ष में आठ माह होता है सफल उत्पादन-

    सरगुजा जिले के वातावरण व जलवायु मशरुम उत्पादन के लिए काफी अनुकूल है। युवा वैज्ञानिक डॉ. प्रशांत शर्मा ने बताया कि सरगुजा जिले में वर्ष में आठ माह तक बड़े आराम से व सफलतापूर्वक मशरुम का उत्पादन किया जा सकता है। शहर के होटलों में इसकी अच्छी मांग है और अब तो लोग हाथोंहाथ मशरुम अन्य सब्जियों की तरह खरीदने लगे हैं।

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