सुकमा। नईदुनिया न्यूज

नक्सल प्रभावित क्षेत्र होने के कारण अंदरुनी क्षेत्रों में बैंक की सुविधा नहीं है। ऐसे इलाकों में जहां बैंक नहीं है या फिर संग्राहकों के खाते नहीं हैं, वहां के संग्राहकों को तेंदूपत्ता का नगद भुगतान देने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। सीमित बैंक होने के कारण संग्राहकों को लम्बा सफर तय कर बैंक जाना पड़ता था इसलिए इलाके के जनप्रतिनिधियों ने प्रभारी मंत्री कवासी लखमा से मांग की थी कि उन्हें नगद भुगतान दिया जाए। इसके बाद प्रभारी मंत्री ने डीएफओ और कलेक्टर से चर्चा की। नगद भुगतान की अनुमति के लिए डीएफओ ने कलेक्टर को पत्र लिखा है।

हरा सोना के नाम से प्रसिद्ध तेंदूपत्ता आदिवासियों के आय का प्रमुख स्त्रोत्र है। ऐसे में तेंदूपत्ता बेचने से लेकर बोनस राशि के लिए बैंकों के चक्कर लगाने पड़ते हैं, जिसमें संग्राहकों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। खासकर कोंटा ब्लाक में तेंदूपत्ता का संग्रहण लगभग हर समिति में पर्याप्त मात्रा में होता है। हर साल नगद ही भुगतान होता था लेकिन इस बार सभी संग्राहकों का भुगतान बैंकों के माध्यम से करने का आदेश जारी हुआ है। इसके बाद कोंटा इलाके के संग्राहकों में काफी मायूसी है। उस इलाके में ऐसी कई समितियां हैं जहां से कोंटा आने के लिए तेलंगाना को पारकर करीब 100 किमी का सफर तय करना पड़ता है। लिहाजा संग्राहकों ने प्रभारी मंत्री से मांग की थी कि उन्हें इस बार भी नगद ही भुगतान किया जाए।

दोनों माध्यम से होगा भुगतान

विभागीय जानकारी के मुताबिक ऐसे इलाके जहां बैंक की सुविधा नहीं है और जहां के संग्राहकों को पांच किमी से ज्यादा सफर तय कर बैंक जाना पड़ता है. वहां के संग्राहकों को तेंदूपत्ता का नगद भुगतान किया जाएगा। इसके अलावा बाकी जगहों पर जहां बैक की सुविधा है वहां शासन के नियमानुसार खातों में ही रकम डाली जाएगी।

'अंदरुनी इलाकों की समितियां जहां बैकों की पर्याप्त सुविधा नहीं है, वहां के संग्राहकों की मांग अनुरूप नगद भुगतान के लिए कलेक्टर को प्रस्ताव भेजा गया है। अनुमति मिलने पर नगद भुगतान किया जाएगा। जहां बैंक की सुविधा है, वहां बैंक खातों में चेक के माध्यम से भुगतान किया जाएगा।'

- केआर बड़ई, डीएफओ, सुकमा

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