0.चार दशक अधूरे पड़े पुल पर हो चुके है दर्जनों हादसे

0.मुख्यमंत्री से गुहार के बाद भी सुनवाई ना होने से नाराजगी

0.ग्रामीणों के साथ आंदोलन की तैयारी में जुटी कांग्रेस

पᆬोटो 14 जेएसपी 10,11 : कांसाबेल टांगरगांव मार्ग पर स्थित जर्जर पुल

जशपुरनगर नईदुनिया प्रतिनिधि। टांगरगांव के लोगों को चार दशक से पुल निर्माण का अधूरा काम पूरा होने का इंतजार है। इस अधूरे पुल में हादसे का शिकार हो कर कई लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। बरसात के दिनों में उपᆬनते हुए नदी में बिना रेलिंग का यह पुल हादसे को न्यौता देता नजर आता है। इससे पुल के सुधार के लिए टांगरगांव सहित आसपास के ग्रामीण मुख्यमंत्री सहित प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से गुहार लगा चुके हैं। लेकिन उनकी कही सुनवाई नहीं हो रही है। अपनी उपेक्षा से आक्रोशित ग्रामीण अब सड़क में उतरने की तैयारी में जुट गए है। ग्रामीणों के साथ कांग्रेस के खड़े हो जाने से चुनावी वर्ष में यह मामला सियासत का रंग ले सकता है। वैसे भी पत्थलगांव विधान सभा को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच कांटे की टक्कर का आगाज अभी से दिखाई देने लगा है। ऐसे में इस तरह का स्थानीय मुद्दा वोट को किस हद तक प्रभावित कर पाएगा,इसे लेकर जानकारों में बहस चल रही है। खासकर उस वक्त जब भाजपा अपनी उपलब्धियों और विकास को मुद्दा बना कर प्रदेश में चौथी बार सरकार का गठन करने के लिए जनता के बीच पहुंच रही है।

मामला टांगरगांव में लंबे अर्से से अधर में लटका हुआ पुल का है। यह पुल मैनी नदी में कांसाबेल और टांगर गांव के बीच स्थित है। स्थानीय ग्रामीणों के मुताबिक इस पुल का निर्माण तकरीबन चार दशक पूर्व शुरू हुआ था। ठेकेदार ने पुल के स्लैब तक का काम तो पूरा किया,इसके बाद पुल के दोनों ओर सुरक्षा के लिए आवश्यक गार्डर का निर्माण किए बगैर काम को बंद कर दिया गया। गार्डर के नाम पर इस पुल में एक पᆬीट ऊंचा दीवार खड़ा हुआ है। इतना ही नहीं निर्माण की गुणवत्ता खराब होने की वजह से इस पुल का जोड़ जगह जगह से पकड़ छोड़ने लगा है। जोड़ें पर मौजूद लोहे अपने जगह से हिलने लगे है। हल्के वाहनों के आने-जाने से ही यह पुल हिलने लगता है। इससे ग्रामीण किसी भी वक्त पुल के ध्वस्त होने की आशंका से सहमे रहते है। मैनी नदी में मुख्यतः आसपास के पहाड़ का पानी उतरता है। बरसात के दिनों में जब यह नदी उपᆬान पर होती है,तो इसका रौद्र रूप देख कर लोगों के रोंगटे खड़े हो जाते है। ऐसे में पानी की तेज धार का दबाव के साथ गुजरने वाले वाहनों का भार यह जर्जर पुल कब तक सह पाएगा इसे लेकर लोग सशंकित रहते हैं। इस पुल की मरम्मत और दोनों ओर गॉर्ड बनाने को लेकर टांगरगांव सहित आसपास के गांव के लोगों ने कलेक्टर सहित जिले के जनप्रतिनिधियों को दर्जनों बार ज्ञापन सौंप कर गुहार लगा चुके है,लेकिन अब तक इस दिशा में कोई पहल नहीं हो पाया है। ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होनें वर्ष 2008 में ग्राम सुराज अभियान के तहत पत्थलगांव पहुंचे मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह को 40 पंचायत के सरपंचों के हस्ताक्षर के साथ इस पुल की मरम्मत के लिए ज्ञापन सौंपा था,लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। जानलेवा हो चुके पुल को लेकर बरती जा रही उपेक्षा और लापरवाही से ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

कांग्रेस ने थामा मुद्दा,सियासत हुई गरम

टांगरगांव के इस पुल का मुद्दा चुनावी वर्ष में एक बार पिᆬर गरमाता नजर आ रहा है। कांग्रेस ने नाराज ग्रामीणों के पक्ष में आते हुए सोमवार को विकास यात्रा के तहत जशपुर पहुंचे मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह को इस संबंध में ज्ञापन सौंपा है। इतना ही नहीं आने वाले दिनों में ग्रामीणों के साथ कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर कांसाबेल में आंदोलन करने की तैयारी में जुटी हुई है। इस पुल पर हो रहे हादसों से टांगरगांव सहित आसपास के 20 से अधिक गांवों में नाराजगी है। इस पुल के बहाने कांग्रेस इन गांव के मतदाताओं को साधने का इरादा कर रही है। टांगरगांव,पत्थलगांव विधान सभा क्षेत्र का हिस्सा है। इस विधान सभा क्षेत्र में भाजपा और कांग्रेस के बीच 6 हजार से कम वोट से हार जीत का पᆬैसला हुआ था। कांग्रेस,टांगरगांव जैसे स्थानीय मुद्दों को हवा देकर भाजपा को घेरने में जुटी हुई है,वहीं भाजपा केन्द्र व प्रदेश सरकार की योजना,उपलब्धि और विकास कार्यो का आक्रामक प्रचार-प्रसार कर मतदाताओं को रिझाने में जुटी हुई है।

----------