दंतेवाड़ा। बैलाडिला पहाड़ी में कथित मुठभेड़ में मारा गया ग्रामीण का हुंगा मंडावी का नाम एनआईए की लिस्ट में है। बेंगपाल निवासी हुंगा का नाम लिस्ट के 39 नंबर पर है। लिस्ट के मुताबिक उसका कार्य क्षेत्र दंतेवाड़ा और बीजापुर दोनों जिले में बताया जा रहा है।

एनआईए ने यह लिस्ट झीरम घाटी घटना के बाद बनाया था। मुठभेड़ में मारे जाने के बाद उसकी पहचान समर्पित नक्सलियों ने हुंगा की पहचान की। समर्पित नक्सलियों के मुताबिक नक्सली संगठन में मृतक को हुंगा के नाम से ही जाना जाता है।

इधर मुठभेड़ के बाद समाजसेवी सोनी सोरी के साथ जिला हॉस्पिटल पहुंचे हुंगा के परिजनों ने उसे भीमा बताया। कथित नक्सली की मां और पत्नी ने भी कहा कि मृतक हुंगा नहीं भीमा है। वह गांव में रहकर खेती किसानी करता था। हिरोली की पहाड़ी में मुठभेड़ नहीं हुआ था। फोर्स उसे पकड़कर गोली मारी है।

ज्ञात हो कि इसे फर्जी मुठभेड़ बताते परिजन पहले शव लेने से मना कर दिया था। तीन दिनों तक शव जिला हॉस्पिटल के मॉरच्यूरी में रखा था। बाद में समझाइश के बाद परिजन शव लेने तैयार हुए। तब सरकारी एंबुलेंस से शव ग्राम हिरोली तक पहुंचाया गया।

इनका कहना है

हिरोली पहाड़ी में मारा गया नक्सली जनमिलीशिया कमांडर था। उसका नाम एनआईए के लिस्ट में भी है। लिस्ट में स्पष्ट बताया गया कि हुंगा बेंगपाल निवासी है। रही बात आरोप-प्रत्यारोप और भीमा-हंुगा नाम तो नक्सली जगह बदलने के साथ नाम बदलते रहते हैं। हो सकता है मारे गए नक्सली का घरेलू नाम भीमा हो, लेकिन नक्सली संगठन में उसे हुंगा के नाम से जाना जाता था। इसकी पहचान और पुष्टि आत्मसमर्पित नक्सलियों ने की है।

-गोरखनाथ बघेल, एएसपी नक्सल ऑपरेशन