बिलासपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

कोनी पुलिस ने युवक की मौत के मामले में दो साल बाद हत्या का अपराध दर्ज किया है। बिलासा ताल के सामने उसकी खून से लथपथ लाश मिली थी। उसके सिर को कुचल दिया गया था। पुलिस ने पीएम रिपोर्ट का परीक्षण कराया। बिसरा परीक्षण व पीएम रिपोर्ट का क्वेरी कराने के बाद यह कार्रवाई की है।

पुलिस के अनुसार मामला वर्ष 2016 का है। कोनी क्षेत्र के बिलासा ताल के सामने अरपा नदी के किनारे तीन फरवरी को युवक की खून से लथपथ लाश मिली थी। युवक का सिर कुचल दिया गया था। उसके शर्ट की जेब में पेंड्रा-गौरेला के किसी दुकानदार की पर्ची थी। उसी के आधार पर मृतक युवक की पहचान कुदुदंड निवासी सौरभ तिवारी पिता स्व.कौशल तिवारी के रूप में हुई थी। सौरभ मूलतः पेंड्रा का रहने वाला था। वह अपनी मां व बहन के साथ कुदुदंड में रहता था। वह आदतन नशेड़ी था। उसकी मां से पूछताछ करने पर पुलिस को पता चला कि रात में वह घूमने के बहाने दोस्तों के साथ निकला था। इसके बाद वह घर वापस नहीं आया। तब से पुलिस इस मामले को प्रथम दृष्टया हत्या मानकर जांच कर रही थी। डॉक्टर ने पीएम रिपोर्ट में मौत के कारणों का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया। इसके चलते हत्या का अपराध दर्ज नहीं किया गया। हालांकि, डॉक्टर ने बिसरा परीक्षण कराने की सलाह भी दी थी। तब से लेकर यह मामला लंबित रहा। लेकिन, कोनी पुलिस इस गंभीर मामले को दबाए बैठी रही। एसपी आरिफ शेख के निर्देश पर फाइल खोली गई। इस बीच बिसरा रिपोर्ट भी मिल गई है।

पिता के साथ भाई ने भी की थी आत्महत्या

मृतक सौरभ के पिता ने फांसी लगाकर आत्महत्या की थी। पिता की मौत के बाद सौरभ नशे की लत में पड़ गया। इस बीच उसके भाई ने भी वर्ष 2015 में फांसी लगा ली थी। मृतक सौरभ की मां व बहन घर में रहती थीं।

तत्कालीन एसपी पाठक ने कराया था परीक्षण

तत्कालीन एसपी अभिषेक पाठक ने मृतक सौरभ के शव के पोस्टमार्टम रिपोर्ट की बारीकी से जांच की और खुद परीक्षण किया। लेकिन, पीएम रिपोर्ट में सिर में चोट लगने से मौत होने का उल्लेख किया गया। इस पर एसपी पाठक ने कुछ बिंदुओं पर सवाल करते हुए डॉक्टर से राय मांगी थी। उनका मानना था कि इस तरह की चोट नशे की हालत में गिरने से भी लग सकती है।

हत्या की गुत्थी सुलझाने दावा करता रहा हवलदार

युवक सौरभ की संदिग्ध मौत के बाद पुलिस मामले की जांच कर रही थी। इस दौरान मृतक के दोस्तों के साथ ही उसके परिजन पर भी हत्या का संदेह जताया गया। एक हवलदार इस हत्या की गुत्थी सुलझाने का दावा करते हुए एसपी पाठक के सामने खड़ा भी हुआ था। लेकिन, पीएम रिपोर्ट का परीक्षण कराने के बाद एसपी पाठक खुद युवक की संदिग्ध मौत को हत्या मानने के लिए तैयार नहीं हुए। इसके चलते यह मामला दबा रहा।