0.खेल के अनुरूप तैयार करने लग जाएंगे कई साल

पᆬोटो क्रमांक- 14जेएसपी 7, 8, 9 रणजीता स्टेडियम में स्थापित खंभे और गड्ढे जिससे ग्राउंड की गुणवत्ता पूर्ण रूप से प्रभावित हो गई है।

जशपुरनगर। नईदुनिया प्रतिनिधि। विकास यात्रा के लिए तैयार किए गए रणजीता स्टेडियम का विक ास पांच साल पीछे चला गया। इस खेल मैदान को खेलों के अनुरूप व गुणवत्तापूर्ण बनाने में अब कापᆬी मशक्कत करने पड़ेंगे। विशेष प्रकार के हाईटेक डोम स्थापित करने के लिए यहां खंभे स्थापित करने सौ से अधिक गड्ढे खोदे गए, जिसमें सीमेंट, पत्थर भरकर खंभों को स्थापित किया गया। इसे स्थापित करने में जहां 15 दिन लग गए थे। वहीं अब खाली करने में भी पसीने छूट रहे हैं और इस प्रक्रिया में स्टेडियम की दुर्गति देखने को मिल रही है।

विकास यात्रा के लिए जब रणजीता स्टेडियम के ग्राउंड को तैयार करते हुए हाईटेक डोम स्थापित किया जा रहा था तो स्थानीय लोगों ने समझा कि ग्रास ग्राउंड की परिकल्पना साकार हो रही है। ठीक उसी प्रक्रिया के तहत यहां खुदाई प्रारंभ हुई और संयत्र स्थापित किए जा रहे थे। हाल ही में विधायक राजशरण भगत के द्वारा राशि भी ग्रास ग्राउंड के लिए स्वीकृति किए जाने की घोषणा की गई थी। लगभग एक सप्ताह के बाद स्थिति स्पष्ट हुई कि खेल मैदान को दुरूस्त करने नहीं बल्कि खेल मैदान में विकास यात्रा के कार्यक्रम के लिए कार्य चल रहा है। इस बीच यहां लगभग 50 बड़े खंभे स्थापित किए गए, जिस पर पूरा डोम टिका था। इन खंभों के लिए गहराई तक खुदाई हुई और सपोर्ट के लिए सीमेंट के साथ पत्थरों का भी उपयोग हुआ। इसके साथ ही लकड़ी के खंभे, खुंटे स्थापित करने के लिए सैकड़ों की संख्या में खुदाई हुई। सहज ही समझा जा सकता है कि अंतरराज्जीय खेलों व प्रदेश के कई राज्य स्तरीय स्पर्धा का आयोजन यहां हर वर्ष किया जाता है। एक साल में आधे दर्जन तो राज्य स्तरीय खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन यहां होते हैं। ऐसे में ग्राउंड की वर्तमान स्थिति यहां आयोजित खेल स्पर्धाओं व ग्राउंड की गुणवत्ता के ठीक विपरीत है। खेल पे्रमियों में निरशा देखने को मिल रही है। अंदाजा लगाया जा रहा है कि पूर्व की तरह यहां जमीन तैयार करने में अब सालों लग सकते हैं और इसके लिए विशेष पᆬंड की आवश्यकता होगी। ग्रास ग्राउंड यहां के खिलाड़ियों की सालों पुरानी मांग है, जिसके कारण जिले सहित प्रदेश स्तर के खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर पर पिछड़ जाते हैं। हर एक आयोजन में राष्ट्रीय स्तर पर असपᆬलता का कारण अच्छे खेल मैदान का नहीं होना बताया जाता है। यहां के खिलाड़ी पथरीली जमीन पर अभ्यास करते हैं और राष्ट्रीय स्तर पर चयनित होने के बाद उनका ग्राउंड बदल जाता है, जिससे वे खेल का अंदाजा ही नहीं लगा पाते हैं। यही कारण होता है कि आदिवासी बाहुल्य जिले के खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान स्थापित नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में विभिन्न आयोजनों में ऐसे खेल मैदान की दुर्गति से खेल भावना और खिलाड़ी दोनों आहत हैं, जिसके लिए राष्ट्रीय स्तर पर कई बार आदेश जारी किए गए हैं। लेकिन खेल मैदान के प्रति न ही शासन और न ही प्रशासन गंभीर नजर आ रहा है।

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