बिलासपुर । नईदुनिया प्रतिनिधि

बहुजन समाज पार्टी ने भंडारपुरी स्थित गुरु परिवार से ताल्लुक रखने वाले उत्तम कुमार गुरु गोसाई को बिलासपुर लोकसभा क्षेत्र से उम्मीदवार बनाया है। बतौर उम्मीदवार गुरु उत्तम कुमार की समाज विशेष के बीच स्वीकार्यता भी बढ़ने लगी है। बिलासपुर लोकसभा चुनाव के इतिहास में यह पहली बार हो रहा है जब उम्मीदवार की हैसियत से समर्थन मांगने समाज के पदाधिकारियों व लोगों के बीच जाने पर उनका गुरु परंपरा के अनुसार स्वागत सत्कार कर रहे हैं। नारियल भेंट करने के साथ ही वोट देने की कसमें भी खा रहे हैं। अजा वर्ग के वोटों का तेजी के साथ हो रहे ध्रुवीकरण से मुकाबला रोचक हो रहा है। कांग्रेस के लिए यह खतरे की घंटी भी साबित हो सकती है।

वर्ष 2013 के विधानसभा चुनाव के आंकड़ों और लोकसभा में बनी सियासी परिस्थितियों पर नजर डालें तो उस समय बसपा का जनाधार काफी तेजी के साथ खिसकने लगा था। खिसकते बसपाई जनाधार के बीच इस बात की संभावना देखी जा रही थी कि तीन महीने बाद होने वाले लोकसभा के चुनाव में कांग्रेस का इसका लाभ मिलेगा। पर हुआ ठीक उल्टा । बसपा के कमजोर होने के बाद भी कांग्रेस को राजनीतिक रूप से फायदा नहीं मिल पाया और कांग्रेस की उम्मीदवार करुणा शुक्ला एक लाख 76 हजार वोटों के बड़े अंतर से चुनाव हार गई । पांच साल के अंतराल में बसपा ने अपनी स्थिति को न केवल मजबूत किया है वरन मैदानी क्षेत्र में पहले के मुकाबले अच्छी स्थिति में है। खासकर अनुसूचित जाति वर्ग की बहुलता वाले इलाकों में पहले की तुलना में सम्मानजनक स्थिति में नजर आ रही है। बसपा ने उत्तम कुमार गुरुगोसाई को उम्मीदवार बनाकर कांगे्रस की दिक्कत बढ़ा दी है। बसपा के रणनीतिकार सोची समझी रणनीति के तहत कैंपेनिंग कर रहे हैं। उत्तम गुरु राजमहंतों व प्रमुख सामाजिक पदाधिकारियों की टीम के साथ बिना किसी शोरगुल किए जनसंपर्क कर रहे हैं। जनसंपर्क के लिए उन्होंने जाति विशेष के मतदाताओं को फोकस किया है। वे और उनकी टीम सीधे उनके बीच पहुंच रहे हैं। समाज प्रमुखों,राजमहंतों व पदाधिकारियों से संपर्क कर समर्थन मांग रहे हैं। जनसंपर्क के बीच एक बड़ी बात यह देखने में आ रही है कि समाज विशेष के लोगों व प्रमुखों द्वारा उनको नारियल भेंटकर वोट देने का वादा भी कर रहे हैं। नारियल के साथ 23 अप्रैल को वोट की भेंट देने की कसमें भी खा रहे हैं। अजा वर्ग के वोटों का बसपा के पक्ष में तेजी के साथ हो रहे ध्रुवीकरण ने कांग्रेसी रणनीतिकारों को चौंका दिया है। 18 लाख 75 हजार 934 मतदाताओं वाले बिलासपुर संसदीय क्षेत्र में अनुसूचित जाति वर्ग के मतदताओं की संख्या तकरीबन चार लाख 35 हजार व अनुसूचित जनजाति वर्ग के मतदाताओं की संख्या तीन लाख 45 हजार के करीब है। जाहिर है यह वर्ग प्रभावी भूमिका निभाने के साथ ही परिणाम को प्रभावित करने की क्षमता भी रखता है। पहले आमतौर पर दोनों ही वर्ग के मतदाताओं की प्रतिबद्घता कांग्रेस के प्रति रही। लंबे अरसे तक कांगे्रस के परंपरागत मतदाताओं के रूप में इनकी पहचान बनी रही। बहुजन समाज पार्टी के उदय और छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के बाद प्रदेश की राजनीति में बसपा ने खास वर्ग के बीच अपनी पैठ बनाई। जातिवादी राजनीति के रूप में प्रदेश में अपनी पहचान बनाने वाली बसपा ने सबसे पहले सियासी तौर से कांगे्रस को चोट पहुंचाने का काम किया । कांग्रेस के वोट बैंक अनुसूचित जाति वर्ग के मतदाताओं के बीच प्रभाव जमाना शुरू किया । अनुसूचित जाति वर्ग के बसपा के प्रति बढ़ते रुझान के कारण कांग्रेस को जमीनीतौर पर भारी नुकसान भी उठाना पड़ा । बिलासपुर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले आठ में से तकरीबन छह विधानसभा क्षेत्र ऐसे हैं जहां अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग की बहुलता है। इन विधानसभा क्षेत्रों में बसपा के पुख्ता वोट बैंक होने और लोगों के बीच अच्छा खासा प्रभाव होने के कारण कांग्रेस को अपनी खोई हुई जमीन तलाशने के लिए मजबूर होना पड़ा। इस बीच परंपरागत वोट बैंक के कांग्रेस से खिसकने का राजनीतिक रूप से सबसे ज्यादा फायदा भाजपा को मिला । वोट बैंक हथियाने के लिए जारी कांग्रेस और बसपा के बीच आपसी झगड़े का लाभ भाजपा ने उठाया और इन क्षेत्रों में अपनी पैठ मजबूत कर ली। अविभाजित मध्यप्रदेश के जमाने में जहां इन क्षेत्रों में कांग्रेस की तूती बोलती थी । अब परिस्थितियां एकदम विपरीत हो गई। इस समुदाय में अपनी खोई प्रतिष्ठा वापस पाने कांग्रेस अब भी लगातार संघर्ष कर रही है।

किस वर्ग के कितने वोट

अनुसूचित जाति वर्ग - 4 लाख 35 हजार

अनुसूचित जनजाति वर्ग -3 लाख 45 हजार

साहू समाज -2 लाख 80 हजार

कुर्मी समाज -2 लाख 85 हजार

यादव समाज -1 लाख 85 हजार

0 कांग्रेस को चुनावी चक्र व्यूह में फंसाने की कोशिश

अनुसूचित जाति वर्ग के परंपरागत वोटरों को कांग्रेस की झोली में जाने से रोकने के लिए भाजपा ने अपनी तरफ से कोशिश शुरू कर दी है। भाजपा को लोकसभा चुनाव के मैदान में अनुसूचित जाति वर्ग से मैदान में उतरे उम्मीदवारों की मौजूदगी के अलावा बसपा उम्मीदवार की तेजी के साथ समाज विशेष के मतदाताओं के बीच घुसपैठ से अजा वर्ग के वोटों में बिखराव की उम्मीद है। इसका फायदा उठाते हुए रणनीतिकारों ने वोटों का ध्रुवीकरण करने और कांग्रेस प्रत्याशी को चुनावी चक्र व्यूह में फंसाने की अपनी कोशिश तेज कर दी है।