दंतेवाड़ा। नईदुनिया प्रतिनिधि

पुलिस-नक्सली मुठभेड़ के बाद चर्चा में आए सुकमा बॉर्डर के ग्राम गोंडेरास में 14 पंचायतों के ग्रामीण एकत्र होकर दो दिनों से ग्रामसभा का आयोजन कर रहे हैं। अनुसूचित क्षेत्र के लिए बने पेसा कानून का पालन करते किसी भी तरह के नए निर्माण के लिए ग्राम पंचायतों की अनुमति जरूरी करने की मांग की है। ग्रामसभा में स्थानीय जनप्रतिनिधियों के अलावा समाजसेवी सोनी सोरी भी मौजूद थीं।

सूत्रों के मुताबिक दंतेवाड़ा- सुकमा बॉर्डर में मौजूद ग्राम पंचायत में बुधवार और गुरूवार को 14 पंचायतों के हजारों ग्रामीण पहुंचे थे। सभी ग्रामीणों ने सामान्य सभा में रखने वाले विषयों को तय किया और एक मसौदा तैयार कर सरकार को सौंपने का निर्णय लिया है। इसमें स्कूल, सड़क, छात्रावास, पेसा कानून और जवानों द्वारा ग्रामीणों से मारपीट का विरोध शामिल है। ग्रामीणों के मुताबिक गुरूवार को भी गोंडेरास में ग्रामीण रैली की शक्ल में पहुंचते रहे। एकत्र ग्रामीणों ने ग्रामसभा में अपने क्षेत्र की समस्याएं बताई जिसमें क्षेत्र के पंच-सरपंच के अलावा सामाजिक कार्यकर्ता सोनी सोढ़ी भी पहुंची थीं। ग्रामीणों ने अपनी समस्या के साथ मांगें भी रखीं। ग्रामीणों का कहना था कि जो स्कूल गांव से शिफ्ट कर दिए गए हैं, उन्हें गांव में खोला जाए। साथ ही, छात्रावास भी खोले जाएं। गांव तक सडक़ बनाने और पेसा कानून का पूरी तरह से पालन करने को लेकर भी चर्चा की गई।

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मारपीट के विरोध में होगा बड़ा आंदोलन

सोनी सोढ़ी ने बताया कि सभा में हजारों ग्रामीण पहुंचे थे। उन्होंने अपनी समस्या सामने रखने के साथ मांगे भी रखीं। ग्रामीण इसे लेकर गांव से शहर और राजधानी तक आंदोलन करने का मन बना लिया है। यह सारे फैसले ग्रामीणों के हैं। उन्होंने कहा कि ग्रामसभा के दायरे को लेकर भी लोगों को जानकारी मिली। इससे पहले गांव में सडक़ और पुलिया के लिए ही ग्रामसभा होती थी। ग्रामीण ग्राम सभा को लेकर जागरूक हो रहे हैं और उन्हें यह भी पता चल रहा है कि वे इससे बड़े फैसले भी ले सकते हैं।

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पहले सचिव-सरपंच पहुंचाएंगे बात

दो दिन तक चली ग्रामसभा के दूसरे दिन गुरूवार को ग्राम पंचायत बड़ेबेड़मा, समेली, रेवाली, जबेली, बुरगुम, नीलावाया, पोटाली, नहाड़ी, गोंडेरास, गोनपाली, पोरदेम, फूलपाड़, वानकापाल और अरनपुर के ग्रामीणों के साथ पंच-सरपंच और सचिव भी पहुंचे थे। सरपंच और सचिवों को ग्रामीणों ने विशेष रूप से ग्रामसभा में आमंत्रित किया था। ग्रामीणों ने कहा कि उनकी समस्याओं और मांगों को सरपंच- सचिव सरकार और प्रशासन तक पहुंचाकर समाधान करवाएंगे। यदि सरपंच- सचिव नाकाम रहते हैं तो ग्रामीण खुद तहसीलदार, कलेक्टर, विधायक, सांसद से लेकर राष्ट्रपति तक अपनी गुहार लगाएंगे। इसके लिए 15 दिन बाद पुनः ग्रामसभा बुलाई जाएगी।

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