नई दिल्ली। तैमूर नगर में न्यूटेक मेडिकल सेंटर के डायग्नोस्टिक लैब की जांच में लापरवाही का बड़ा मामला सामने आया है। डायग्नोस्टिक लैब ने जांच रिपोर्ट में उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर निवासी व्यक्ति को एचआइवी संक्रमित बता दिया। इस वजह से उनका दुबई का वीजा नहीं बन पाया।

रिपोर्ट गलत साबित होने पर डीएमसी (दिल्ली मेडिकल काउंसिल) ने दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय को पत्र लिखकर सेंटर बंद करने की सिफारिश की है। डीएमसी के रजिस्ट्रार डॉ. गिरीश त्यागी ने कहा कि पीड़ित व्यक्ति को नौकरी के लिए दुबई जाना था। वीजा के लिए मेडिकल रिपोर्ट जरूरी थी। इसलिए उसने एचआइवी की जांच कराई।

एक फरवरी, 2017 को सेंटर द्वारा जारी जांच रिपोर्ट में उसे एचआइवी संक्रमित बताया गया। बाद में उस व्यक्ति ने दो अलग-अलग जगहों (उत्तराखंड के एक सरकारी अस्पताल व हरियाणा के गुरुग्राम स्थित डायग्नोस्टिक लैब) पर जांच कराई। इन दोनों जगह जांच में रिपोर्ट एचआइवी निगेटिव आई।

इसके बाद पीड़ित ने मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआइ) में मामले की शिकायत की। एमसीआइ ने जांच के लिए मामला डीएमसी के पास भेजा। डीएमसी ने सेंटर को तीन बार (23 मई, एक अगस्त व 22 अगस्त) को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने को कहा, लेकिन सेंटर की तरफ से जवाब नहीं दिया गया।

डॉ. त्यागी ने कहा कि उस सेंटर के डायग्नोस्टिक लैब के डॉक्टर के बारे में भी कोई जानकारी नहीं मिली। ऐसी स्थिति में महानिदेशालय से सेंटर बंद कराने के लिए कहा गया है। दिल्ली में फर्जी डायग्नोस्टिक लैब भी खूब चल रहे हैं। यहां जांच के लिए डॉक्टर तक मौजूद नहीं होते और मरीजों को फर्जी जांच रिपोर्ट पकड़ा दी जाती है।

डीएमसी की कार्रवाई में पहले ऐसे मामले भी सामने आ चुके हैं, जिसमें यह साबित हुआ है कि फर्जी डायग्नोस्टिक लैबों के संचालन के खेल में पैथोलॉजी के कुछ डॉक्टर भी शामिल होते हैं। ये लोग थोड़े लालच में जांच रिपोर्ट पर अपने नाम का इस्तेमाल करने की इजाजत दे देते हैं। इसलिए किसी भी डायग्नोस्टिक लैब में जांच कराने से पहले सावधानी जरूरी है।