नई दिल्ली। एग्रीकल्चर साइंस कांग्रेस की शुरुआत बुधवार को हो गई, जिसमें हिस्सा लेने के लिए देश-विदेश के दो हजार से अधिक कृषि वैज्ञानिक पहुंचे हैं। इसमें कृषि क्षेत्र में घटते प्राकृतिक संसाधनों और बढ़ती आबादी के बीच सामंजस्य बैठाने जैसी बड़ी चुनौतियों पर विचार किया जाएगा। केंद्रीय कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह ने साइंस कांग्रेस को वैश्विक कुंभ की संज्ञा दी।

उद्घाटन करने के बाद कृषि मंत्री सिंह ने कहा कि हम वैश्विक ग्राम की अवधारणा में विश्वास करते हैं। इस सम्मेलन के दौरान विज्ञान, प्रौद्योगिकी और अनुसंधान के ज्ञान के नतीजों का मंथन किसानों और मानवता के कल्याण के लिए अत्यधिक खास होगा। सिंह ने कहा कि सरकार ने खेती के लिए सुधार के साथ-साथ किसानों की समृद्धि के लिए कई नए और व्यावहारिक कदम उठाये हैं।

किसानों की आजीविका सुरक्षा और कल्याण को सरकार प्राथमिकता देती है। किसानों की आय दोगुनी करने के हर संभव प्रयास किये जा रहे हैं। सरकार ने किसानों की सुनिश्चित आय के लिए प्रधानमंत्री किसान सम्मान (पीएम-किसानन) जैसी नई योजना की शुरुआत की है। इसका लाभ देश के 12 करोड़ किसानों को मिलेगा।

इससे पूूर्व, 14वें कृषि साइंस कांग्रेस के संयोजक डॉ. एके सिंह ने इसमें हिस्सा लेने वाले प्रतिभागियों का स्वागत करने के साथ चार दिवसीय कार्यक्रम का विस्तार से ब्योरा दिया। राष्ट्रीय कृषि विज्ञान एकेडमी के चेयरमैन डा. पंजाब सिंह ने बताया कि इसमें 17 देशों के दो हजार से अधिक प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं। 'कृषि में क्रांति के लिए नवाचार' विषय पर कुल 32 तकनीकी सत्र होंगे, जिसके बाद तैयार सिफारिशें सरकार को सौंपी जाएंगी।

उन्होंने कहा कि हमने कृषि के समक्ष पैदा हुई चुनौतियों को स्वीकार किया है, जिसके निराकरण के लिए साइंस कांग्रेस में कारगर उपाय सुझाए जाने की संभावना है। आइसीएआर के महानिदेशक डॉ. त्रिलोचन महापात्रा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मंशा के अनुरूप किसानों की आमदनी को दोगुना करने का लक्ष्य समय से पहले प्राप्त कर लिये जाने की संभावना है।

खाद्य सुरक्षा के बाद अब पौष्टिक सुरक्षा की चुनौती को पाना हमारा लक्ष्य है। घटते प्राकृतिक संसाधनों और बढ़ती आबादी के बीच सामंजस्य बैठाना वैज्ञानिकों के समक्ष बड़ी चुनौती है। इसके लिए राज्यों के साथ प्राइवेट सेक्टर को भी आगे आना होगा।