नई दिल्ली। पायलट के ड्यूटी निर्धारित समय को लेकर फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस (एफआईए) सोमवार को हाईकोर्ट पहुंच गया। उन्होंने मांग की अदालत डीजीसीए को निर्धारित उड़ान और समय में बदलाव की अनुमति न दे। जेट एयरवेज, इंडिगो, स्पाइसजेट और गो एयरवेज का प्रतिनिधित्व करने वाले एफआइए ने दिल्ली हाईकोर्ट की पीठ के सामने याचिका लगाई। याचिका में कहा गया कि उड़ान के समय में बदलाव कभी-कभी जरूरी होता है।

एफआईए ने याचिका में उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे गत रविवार को तूफान के कारण दिल्ली से लगभग 70 उड़ानों को अन्य हवाई अड्डों की तरफ भेजना पड़ा था। हाकोर्ट के 18 अप्रैल के निर्देश का हवाला देते हुए एफआईए ने कहा कि विमानों को दूसरी जगह पर भेजने के कारण रविवार को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। साथ ही लैंडिंग की संख्या में वृद्धि हुई, जबकि जहां पर विमानों को मोड़ा गया था, वहां पर स्टैंडबाय में पायलट हवाई अड्डे पर उपलब्ध नहीं थे।

एयर इंडिया ने अपनी याचिका में नौ मई की घटना का जिक्र किया कि जब शिकागो में खराब मौसम के चलते दिल्ली-शिकागो उड़ान मिल्वौकी (यूएस) में भेजी गई थी जिसके कारण उड़ान सात घंटे तक की देरी हुई। उस दिन चालक दल के लिए केवल एक लैंडिंग की अनुमति थी। विमान कंपनी ने कहा कि मिल्वौकी से शिकागो तक उड़ान की अवधि 19 मिनट थी, जबकि स्टैंडबाय चालक दल को बुलाए जाने तक इसके लिए यात्रियों को सात घंटे तक इंतजार करना पड़ा। इस पर पीठ ने कहा कि एयरलाइंस कंपनी के लाभ से ज्यादा महत्वपूर्ण है किसी की जिंदगी।

ज्ञात हो कि एफआईए ने अदालत से मांग की कि वे 18 अप्रैल के आदेश से बहुत प्रभावित हो रहे हैं और यह फैसला उन्हें सुने बिना पारित किया गया था। 18 अप्रैल के आदेश के अनुसार नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने दो मई को एक पत्र जारी किया था जिसे उसने पहले मंजूरी दे दी थी।

निलंबित पायलट को उड़ान भरने की अनुमति देने पर केंद्र से मांगा जवाब-

जेट एयरवेज द्वारा दो निलंबित पायलट को उड़ान भरने की अनुमति देने को लेकर दायर याचिका पर हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। हाई कोर्ट पीठ ने नागरिक उड्डयन मंत्रालय, डीजीसीए और जेट एयरवेज को नोटिस जारी कर मंगलवार तक जवाब दाखिल करने को कहा।

ज्ञात हो कि याचिकाकर्ता पत्रकार रजनीश कपूर ने आरोप लगाया था कि संचालित उड़ान के कॉकपिट में अनधिकृत प्रवेश की इजाजत देने पर विमानपत्तन नियामक (डीजीसीए) ने दोनों पायलट का लाइसेंस रद्द कर दिया था।

लेकिन, डीजीसीए के आदेश के बावजूद जेट एयरवेज के वाइस प्रेसिडेंट (ऑपरेशन) ने दोनों पायलट को फ्लाइट ड्यूटी की अनुमति दे दी। याची के वकील निखिल बोरवंकर ने दावा किया था कि निलंबित होने के बावजूद दो में एक पायलट को उड़ान भरने दिया गया।