नई दिल्ली। दिल्ली की राजनीति में गत चार दिनों से सियासी घमासान मचा हुआ है। आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के बीच लोकसभा चुनाव 2019 के मद्देनजर गठबंधन की चर्चा सुर्खियां बनी हुई हैं। इस गठबंधन की सूचना लीक हो जाने पर अब दोनों ही पार्टियां अपनी सफाई देने में लगी हैं तो भाजपा भी इस गठबंधन को लेकर अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने में लग गई है। राजनीतिक गलियारों की इसी गहमागहमी के बीच नईदुनिया के सहयोगी अखबार दैनिक जागरण के मुख्य संवाददाता संजीव गुप्ता ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय माकन से लंबी बातचीत की। प्रस्तुत हैं मुख्य अंश...

1. आम आदमी पार्टी और कांग्रेस गठबंधन की चर्चा का सच आखिर है क्या?

- यह चर्चा पूरी तरह से आम आदमी पार्टी द्वारा छोड़ा गया शिगूफा है। हमारी तरफ से न तो कोई बैठक हुई है और न मेरी किसी भी आप नेता से ऐसी कोई बात हुई है। दरअसल, केजरीवाल की माफी की राजनीति से न केवल उनकी बल्कि पार्टी की भी काफी फजीहत हुई है। उससे ध्यान हटाने को भी आप ने ऐसी चाल चली है। वैसे भी गठबंधन की राजनीति का दिल्ली में कभी कोई स्थान नहीं रहा।

2. आप नेता दिलीप पांडे एवं अलका लांबा और भाजपा नेत्री शाजिया इल्मी ने भी इस प्रकरण में ट्वीट किया है। कपिला मिश्र ने भी ऐसी चर्चाओं को बल दिया है?

- हो सकता है कि कपिल मिश्र को ज्यादा जानकारी हो, मगर जहां तक मेरी सूचना है, यह सब अफवाह है। इनके अलावा आपने जितने भी नाम गिनाए हैं, उनमें से किसी का कद इतना नहीं है कि मैं उनकी बात या ट्वीट पर कोई सफाई दूं। मैं तो यही कहूंगा कि कांग्रेस ऐसा कोई गठबंधन करने नहीं जा रही।

3. कहा जा रहा है पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के घर पर गठबंधन को लेकर बैठकें हुई हैं?

- मनमोहन सिंह जी बहुत समझदार और समर्पित पार्टी नेता हैं। मुझे विश्वास में लिए बिना ऐसी कोई बैठक उनके यहां नहीं हो सकती।

4. कहा तो यह भी जा रहा है कि कांग्रेस के कुछ नेता आपको दरकिनार कर गठबंधन की कोशिशों में जुटे हैं?

- देखिए, किसी भी पार्टी में थोड़ी बहुत गुटबाजी या विचारों का मतभेद चलता रहता है। लेकिन, इस मुद्दे पर पार्टी के सभी नेता एक सोच रखते हैं। शीला दीक्षित और सभी पूर्व मंत्री हमारे साथ हैं, संदीप दीक्षित और जय प्रकाश अग्रवाल भी जल्द साथ आ जाएंगे।

5. क्या आपको नहीं लगता कि आप ने कांग्रेस के ही वोट बैंक में सेंध लगाई है?

- बिल्कुल, लेकिन 2014 और 2015 में कांग्रेस के खिलाफ एक लहर चल रही थी, इसीलिए आप को बहुमत मिल गया। अब ऐसा नहीं है। कांग्रेस के शासन को जनता लगातार याद कर रही है। इसीलिए कांग्रेस का मत फीसद नौ से बढ़कर 26 हो गया है जबकि आप का 56 से घटकर 26 पर आ गया है। हर चुनाव में उसे हार मिल रही है। वैसे भी कांग्रेस के हर नेता, हर विधायक, पूर्व मंत्री एवं सांसद की आज सत्ता में न होते हुए भी फेस वैल्यू हैं जबकि आप में एक दो को छोड़ दें तो लोग उन्हें पहचानते भी नहीं हैं। कम शब्दों में कहूं तो आप एक मरा हुआ सांप है और हम उसे अपने गले में क्यों डालें।

6. आपके हिसाब से आप ने यह शिगूफा क्यों छेड़ा?

- आम आदमी पार्टी आज अपने ही वर्चस्व की लडाई लड़ रही है। उनकी हर लड़ाई भी खुद के अधिकारों को लेकर है। आज तक कभी कोई विधानसभा सत्र तक उन्होंने जनता से जुड़े मुद्दे पर नहीं बुलाया। इसीलिए बार-बार अपने बयान से पलट जाते हैं।

7. इस शिगूफे से कांग्रेस को फायदा होगा या नुकसान?

- कांग्रेस को तो फायदा ही हुआ है। इस प्रकरण ने यह साबित कर दिया है कि कांग्रेस मजबूत हो रही है जबकि आम आदमी पार्टी कमजोर हो रही है। इसीलिए कभी अरविंद केजरीवाल माफी की सियासत करते हैं तो कभी उन नेताओं की भी तारीफ करने लगते हैं, जिन्हें कल तक भ्रष्ट कहते थे।

8. मतलब 2019 का लोकसभा और 2020 का विधानसभा चुनाव कांग्रेस दिल्ली में अपने दम पर लड़ेगी?

- बिल्कुल। हमने इसके लिए रणनीति भी तैयार कर ली है। हमारा जल सत्याग्रह इसी रणनीति का हिस्सा है। जल्द ही हम संविधान बचाओ आंदोलन भी शुरू करेंगे। वैसे भी लोकसभा चुनाव विधानसभा चुनाव का सेमीफाइनल होगा। इस सेमीफाइनल का परिणाम बहुत कुछ बयां कर देगा।