नई दिल्ली। सार्वजनिक स्थलों पर स्तनपान और चाइल्ड केयर रूम की सुविधा को हाई कोर्ट ने गंभीर मामला बताया है। याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायमूर्ति राजेंद्र मेनन और न्यायमूर्ति वीके राव ने कहा कि कुछ सार्वजनिक स्थलों पर स्तनपान की सुविधा उपलब्ध कराने से समस्या का हल नहीं होगा। मुख्य पीठ ने केंद्र और राज्य सरकार को संयुक्त बैठक कर बिल्डिग बायलॉज में बदलाव करने के आदेश दिए हैं।

साथ ही लिए गए निर्णयों का खाका अदालत में चार सप्ताह के अंदर पेश करने का आदेश दिया गया है। मामले में अगली सुनवाई 2 जुलाई को होगी। बुधवार को सुनवाई के दौरान 17 महीने का याचिकाकर्ता अव्यान भी पेश हुआ। अव्यान जब नौ माह का था। तब उनकी तरफ से उनकी मां नेहा रस्तोगी ने याचिका दायर कर इस पर सवाल उठाया था।

मुख्य पीठ ने निर्देश दिया कि यह देखा जाए कि बिल्डिग बायलॉज में किस तरीके से बदलाव किए जा सकते हैं। किस क्षेत्र में जनसंख्या के आधार पर कितने स्तनपान स्थलों की जरूरत होगी यह भी देखना होगा। इस मामले पर केंद्र सरकार ने दिल्ली उच्च न्यायालय को पूर्व में बताया था कि केंद्र ने सभी राज्यों के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर सार्वजनिक स्थानों पर स्तनपान कक्ष बनाने को कहा है, लेकिन किसी की भी तरफ से इस पर कोई जवाब अब तक नहीं मिला है।

वहीं, दिल्ली सरकार ने अदालत को बताया कि अदालत के निर्देश पर सभी जिलों के अधिकारियों को सार्वजनिक स्थान पर स्तनपान की सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं।