नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस के स्पेशल स्टाफ ने दूसरों के नाम पर सिम एक्टिव कराकर अपराधियों को बेचने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया है। लगभग दो सौ सिम के साथ सात लोगों को गिरफ्तार भी किया है, जिनमें एक कॉल सेंटर संचालक भी शामिल है। व फर्जी सिम का खरीदार था। इस गिरोह का पर्दाफाश एक व्यवसायी को दी गई धमकी की जांच के दौरान हुआ।

इस साल फरवरी में एक व्यवसायी ने रंगदारी मांगने की शिकायत दर्ज कराई थी। इस मामले की जांच के दौरान पुलिस को सिम बेचने वाले कन्नौज गिरोह का पता चला। जांच में सामने आया है कि इनके द्वारा बेचे गए सिम से बीते साल दिल्ली के उत्तम नगर निवासी व्यवसायी को रंगदारी की धमकी दी गई थी। इस मामले में भी आरोपी फरार है।

जिला पुलिस उपायुक्त विजयंता आर्या ने बताया कि स्पेशल स्टाफ की टीम एक आपराधिक मामले की जांच कर रही थी। इसमें एक सिम का इस्तेमाल किया गया था। गुरुवार को सिम की कॉल डिटेल्स निकाली गई। सिम कन्नौज के प्रवीन के नाम पर थी, मगर पूछताछ में प्रवीन ने बताया कि उसने कभी भी इस सिम को लिया ही नहीं। जांच में यह बात सामने आई कि इस सिम का इस्तेमाल शकील नामक व्यक्ति कर रहा था।

मामले की गंभीरता को देखते स्पेशल टीम गठित की गई। पुलिस टीम ने कन्नौज निवासी शकील को हिरासत में लेकर पूछताछ की तो पूरा मामला सामने आ गया। शकील ने बताया कि वह सिम वितरक है। वह दोस्त रामजी पटेल एवं रचित के साथ सिम एक्टिव कराकर छह सौ रुपये में बेचता था। इसके लिए रचित के संपर्क में दिल्ली निवासी विशाल भी था, जो टेलीकॉम कंपनी में काम करता है।

विशाल दोस्त पंकज एवं मनीषा के साथ रचित से सिम खरीदकर दिल्ली एनसीआर में सक्रिय आपराधिक गिरोहों को बेचता था। पुलिस ने इन सभी को गुरुवार को गिरफ्तार कर लिया। जांच में यह बात भी सामने आई कि इन्होंने निर्माण विहार में स्थित फर्जी कॉल सेंटर संचालक को काफी संख्या में सिम बेच रखे हैं। सब इंस्पेक्टर राकेश एवं आनंद की टीम ने कॉल सेंटर पर छापा मारकर प्रिस को भी गिरफ्तार कर लिया।

रचित इन सिमों को विशाल को छह सौ रुपये में बेचता था, फिर विशाल अपने अन्य संपर्कों के माध्यम से इन सिम को साढ़े तीन हजार तक में बेच देता था। फर्जी कॉल सेंटर, बीमा के नाम पर झांसा देने वाले, रंगदारी एवं फिरौती मांगने वाले गिरोहों के लोगों को ये सिम बेची जाती थीं।

पूछताछ में बताया जब कोई नया सिम कार्ड लेने के लिए आता था तो बायोमिट्रीक सिस्टम से उसके फिंगर प्रिट लिए जाते थे। शकील एवं उसके साथी सिम लेने वालों के कई बार फिंगर प्रिट लेकर उसकी बगैर जानकारी में कई सिम एक्टिव करा लेते थे। इन्होंने करीब छह महीने में सोलह सौ से अधिक सिम को बेचने की बात स्वीकार की है।