नवीन कुमार, जालंधर। 'शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले, वतन पर मरने वालों का यही बाकी निशां होगा...।' रामप्रसाद बिस्मिल की यह पक्तियां किसे याद नहीं होंगी। लेकिन इसे दुर्भाग्य ही कहें कि इन वीरों को याद करने के लिए हमारे पास न ही कोई योजना है और न कोई बजट। इसलिए पंजाब के कई जिलों में इन शूरवीरों की इतिहास गाथा सरकार नहीं गाती। हां, इतना जरूर है कि 15 अगस्त व 26 जनवरी पर शहीद के परिजनों को रेडक्रॉस जैसी संस्थाओं की मदद से एक शॉल व कुछ धनराशि देकर सम्मानित जरूर कर दिया जाता है।

यह जानकारी सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत मिली है। दैनिक जागरण की ओर से पंजाब के मुख्य सचिव से आरटीआइ के तहत यह जानकारी मांगी गई थी। राज्य के विभिन्न जिलों से डिस्ट्रिक्ट डिफेंस सर्विस वेलफेयर अफसर (डीडीएसडब्ल्यूओ) की ओर से भेजी गई जानकारी के मुताबिक पंजाब सरकार और केंद्र सरकार के पास इन शहीदों के लिए योजना नहीं है।

जालंधर से मिली जानकारी में यह साफ लिखा है कि इन शहीदों की याद में प्रशासन ने कोई आयोजन नहीं किया, क्योंकि उनके पास फंड नहीं है। यह हाल पंजाब के अन्य जिलों का भी है। यही नहीं, शहीदों के नाबालिग बच्चों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए भी सरकार के पास कोई स्पष्ट योजना ही नहीं है। एक जनवरी, 2012 से 27 सितंबर, 2018 तक पंजाब के 63 वीर जवान देश की रक्षा करते हुए शहीद हो गए। इनमें से कुछ परिवारों को नौकरी तो मिल गई, कुछ को नहीं।

राज्य के विभिन्न जिलों से डिस्ट्रिक्ट डिफेंस सर्विस वेलफेयर अफसर की ओर से भेजी गई जानकारी के मुताबिक गुरदासपुर ने सबसे ज्यादा 11 सपूतों को खोया। होशियारपुर के 10 जवान देश की सेवा करते हुए कुर्बान हुए, जबकि कपूरथला व मोगा के एक-एक जवान शहीद हुए। पंजाब सरकार ने दी नौ लाख रुपये की सहायता पंजाब सरकार की ओर से शहीद होने वाले शादीशुदा वीर जवान को नौ लाख रुपये की सहायता राशि दी जाती है।

अविवाहित जवानों के परिजनों को सात लाख रुपये दिए जाते हैं। हालांकि, तरनतारन से मिली जानकारी के मुताबिक पंजाब सरकार ने अब सहायता राशि दो लाख रुपये से बढ़ाकर पांच लाख रुपये कर दी है। साथ ही परिवार के एक सदस्य को नौकरी भी दी जाती है। वहीं केंद्र सरकार की ओर से इन शहीदों के परिवार को कितनी राशि दी जाती है, इसकी स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। नौकरी देने की प्रक्रिया जारी : 63 शहीद सैनिक के परिजनों में से 19 को अब तक नौकरी नहीं मिली है। इनको नौकरी देने की प्रक्रिया जारी है। पटियाला में एक, पठानकोट में चार, अमृतसर में एक, बठिंडा में दो, संगरूर में एक, होशियारपुर में तीन और गुरदासपुर में एक केस में नौकरी नहीं मिली है।