गाजियाबाद। गाजियाबाद के मोदीनगर स्थित बखरवा गांव के तालाब की सफाई के दौरान ग्रामीणों को हजारों साल पुराने बर्तन, औजार व खिलौने मिले हैं। इतिहासकारों का दावा है कि अवशेष करीब दो हजार साल पुरानी सभ्यता की निशानी हैं। हालांकि पुरातत्व विभाग ने पुरानी सभ्यता और संस्कृति की निशानी को सहेजने की अभी तक जहमत नहीं उठाई है। पिछले कुछ समय से बखरवा गांव में तालाब की सफाई का काम चल रहा है। खोदाई के दौरान मिट्टी में दबे मिट्टी के बर्तन, खिलौने, पशुओं के गले में बांधने वाले मिट्टी के घुंघरूनुमा अवशेष, पतीलीनुमा छोटा बर्तन, औजारों के अवशेष आदि सामान मिले।

इसकी जानकारी पतला के जनता डिग्री कॉलेज से बीए की पढ़ाई कर रहे गांव के सचिन कुमार को लगी। वह सभी अवशेषों को अपने घर ले आया और खोदाई पर उसकी निगाह लगी रही। उसे समय-समय पर लगातार अवशेष मिलते चले गए। दो दिन पहले उसने इसकी जानकारी एमएम डिग्री कॉलेज के इतिहास विषय के प्रोफेसर एवं इतिहासकार डॉ. केके शर्मा को दी। केके शर्मा सचिन के घर पहुंचे। उन्होंने अवशेषों के बारे में बताया कि इस तरह के बर्तन और औजार करीब दो हजार साल पुरानी संस्कृति की निशानी हैं।

उनका दावा है कि कुषाण, गुप्त और हड़प्पा काल में ऐसे ही मिट्टी के बर्तनों का उपयोग होता था। ग्रामीण विकास, प्रशांत, अजीत आदि ने बताया कि मकान बनाते समय नींव खोदने, शौचालय के लिए टैंक की खोदाई करने पर ऐसे अवशेष समय समय पर निकलते रहते हैं।

मुरादनगर के सुठारी व सुराना गांव में भी टीले की खोदाई के दौरान तीन साल पहले मिट्टी के अवशेष और औजार मिल चुके हैं। पुरातत्व विभाग की टीम ने वहां एक बार सर्वे भी किया। इसके अलावा अबूपुर, भनैड़ा समेत हरनंदी के किनारे के तमाम गांवों में ऐसे अवशेष समय-समय पर निकलते रहते हैं, जो हजारों साल पुराने इतिहास की गवाही देते हैं।