नई दिल्ली। JNU देशद्रोह मामले में सोमवार को सुनवाई के बाद अदालत ने दिल्ली सरकार को 23 जुलाई तक इस मामले में रिपोर्ट सौंपने का वक्त दिया है। इस समय सीमा के अंदर दिल्ली सरकार को अदालत को बताना होगा कि JNU छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार सहित अन्य आरोपियों के खिलाफ दायर किए गए आरोप पत्र के आधार पर मामला चलाने की मंजूरी दी जाएगी या नहीं।

पिछली सुनवाई पर दिल्ली सरकार की तरफ से पटियाला हाउस की एक अदालत में जवाब दाखिल कर कहा गया था कि पुलिस ने बगैर उनकी मंजूरी लिए आरोप पत्र दाखिल किया है। इस मामले में सरकार ने वरिष्ठ अधिवक्ता से राय मांगी है। पूरी प्रक्रिया में एक महीने से ज्यादा का वक्त लग जाएगा।

इस साल 14 जनवरी को दिल्ली पुलिस ने करीब 1200 पन्ने का आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल किया था। इसमें JNU छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार, डेमोक्रेटिक स्टूडेंट यूनियन के सदस्य उमर खालिद और इतिहास विषय के रिसर्चर अनिर्बान भट्टाचार्या को मुख्य आरोपी बनाया था।

वहीं, सात अन्य आरोपियों में मुजीब हुसैन, मुनीब हुसैन, उमर गुल, आकिब हुसैन, रईस रसूल, बसरत अली और खालिद बशीर भट भी शामिल हैं। इसके अलावा आरोप पत्र के कॉलम नंबर 12 में संदिग्धों में शहला राशिद, डी राजा की बेटी अपराजिता राजा,रामा नागा, आशुतोष, रुबैना सैफी, समर खान सहित 36 को रखा गया है। कॉलम नंबर 12 संदिग्धों के लिए इस्तेमाल किया जाता है। जिनके खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं होते हैं।