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    नवजात को मरा बताने पर दिल्ली सरकार ने किया मैक्स अस्पताल का लाइसेंस रद्द

    Published: Wed, 06 Dec 2017 10:38 PM (IST) | Updated: Sat, 09 Dec 2017 08:34 AM (IST)
    By: Editorial Team
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    नई दिल्ली। दिल्ली के शालीमार स्थित मैक्स हॉस्पिटल का लाइसेंस रद्द कर दिया गया है। दिल्ली सरकार ने इस मामले में जांच रिपोर्ट आने के बाद ये कड़ा फैसला लिया।

    इस बारे में दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने कहा कि हॉस्पिटल द्वारा नवजात को मरा हुआ बताना घोर लापरवाही है। इसे किसी भी कीमत पर स्वीकारा नहीं जा सकता।

    आपको बता दें कि एक दिन पूर्व ही 22 हफ़्ते के जिंदा नवजात को मृत बताकर माता-पिता को सौंपने के मामले में दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन मैक्स अस्पताल और डॉक्टरों के पक्ष में आकर खड़ा हो गया था। दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन ने बयान जारी करके कहा था कि 'समय से पहले होने वाली ऐसी डिलीवरी के लिए कोई प्रोटोकॉल या गाइडलाइंस नहीं है। लेकिन भारत का कानून 20 हफ़्ते तक गर्भपात की इजाज़त देता है और कुछ ज़्यादा गंभीर मामलों में 24 हफ़्ते में गर्भपात की इजाज़त अदालत ने दी है यानी भारतीय कानून भी 24 हफ्ते तक के भ्रूण को ज़िंदा ना बचने लायक मानता है।'

    इससे पहले शालीमार बाग स्थित मैक्स अस्पताल के डॉक्टरों ने जिस जिंदा नवजात को पांच दिन पहले मृत घोषित कर दिया था, उसने बुधवार को पीतमपुरा के अग्रवाल अस्पताल में दम तोड़ दिया। नवजात की मौत से गुस्साए परिजनों ने मैक्स अस्पताल पर प्रदर्शन किया और आरोपी डॉक्टर की गिरफ्तारी की मांग की।

    यह है मामला-

    अमन विहार निवासी प्रवीण कुमार के अनुसार उनकी बेटी वर्षा की शादी निहाल विहार निवासी आशीष से तीन साल पूर्व हुई थी। वर्षा करीब 22 हफ्ते की गर्भवती थी। उसे 27 नवंबर की रात पेट में दर्द होने पर पश्चिम विहार के अट्टम नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया।

    अगले दिन उसकी हालत ज्यादा बिगड़ने पर उसे 28 नवंबर को दिन के करीब 12 बजे मैक्स अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जांच के क्रम में डॉक्टरों ने वर्षा को रक्तस्राव होने की जानकारी देते हुए एक इंजेक्श्न लगाने की बात कही।

    प्रवीण के मुताबिक अस्पताल की ओर से 29 नवंबर को परिजनों को बताया गया कि वर्षा को फिर से रक्तस्राव शुरू हो गया है। ऐसे में डिलीवरी करनी होगी। अगले दिन 30 नवंबर की सुबह साढ़े सात बजे उनकी बेटी ने एक बेटे को जन्म दिया।

    इसके बाद वर्षा ने एक बेटी को भी जन्म दिया, जिसे डॉक्टर ने मृत बता दिया। इसके बाद उन्हें कहा कि जिंदा बच्चा चूंकि 22 हफ्ते का है और समय पूर्व उसकी डिलीवरी हुई है, उसे एनआइसीयू (निओ नैटल इंटेसिव केयर यूनिट) में रखना होगा। इसके लिए उन्हें प्रतिदिन के हिसाब से एक लाख रुपये देने होंगे।

    भारी भरकम खर्च के कारण परिजनों ने असमर्थता जता दी। इसके बाद दिन के करीब डेढ़ बजे परिजनों को बताया गया कि बेटे की भी मौत हो गई है। ऐसे में अस्पताल प्रशासन ने दोनों बच्चे को पैकेट में बंद कर परिजनों को सौंप दिया।

    इसके बाद बच्चे के नाना व पिता दोनों को ऑटो से लेकर अंतिम संस्कार के लिए जा रहे थे कि रोहिणी मधुबन चौक के पास एक पैकेट के अंदर बच्चे में हलचल हुई तो प्रवीण ने तुरंत पैकट खोलकर देखा तो बच्चा जिंदा निकला। वे उसे तुरंत पास के पीतमपुरा स्थित अग्रवाल नर्सिंग होम लेकर गए।

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