नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया था कि दिवाली के दिन रात को 8 से 10 बजे तक ही पटाखे फोड़े जाएं लेकिन दिल्लीवासियों ने इसका पालन न करते हुए तय घंटों से अधिक समय तक पटाखे फोड़े। वैसे भी पिछले दो सप्ताह से दिल्ली-एनसीआर में एयर क्वाविटी इंडेक्स तेजी से खराब हुआ है। बुधवार शाम को तो पटाखों के जहरीले धुंए ने और भी आफत ला दी।

दिल्लीवासियों को यह बताने के लिए कि वायु प्रदूषण के कारण किस तरह फेफड़े बुरी तरह प्रभावित होते हैं, एक समूह ने राजेंद्र नगर में श्री गंगा राम हॉस्पिटल के सामने पिछले सप्ताह फेफड़ों की विशाल पेअर को इंस्टॉल किया था। बेंगलुरु के एक गैर सरकारी संगठन Jhatkaa.org ने स्थानीय एन्वायरमेंटल एनजीओ हेल्प दिल्ली ब्रीद और लंग केयर फाउंडेशन के साथ मिलकर यह पहल की है।

लंग केयर फाउंडेशन के डॉ. अरविंद कुमार ने कहा, 'हमने हाई एफिशियंसी पार्टिक्यूलेट एयर (HEPA) फिल्टर की मदद से मानव फेफड़ों को रीक्रिएट किया। यह फिल्टर्स ऑपरेशन थिएटर्स के अंदर धूल पकड़ने के लिए इस्तेमाल होते हैं। मानव फेफड़ों के कामकाज की नकल के लिए हमने पंखों के साथ नकली फेफड़े फिट किए जो कि सांस लेते और छोड़ते हैं।'

वे कहते हैं कि हमने सोचा कि आधे फेफड़ों को डार्क होने में कम से कम एक महीना तो लगेगा लेकिन इनका रंग तो 24 घंटों में बदल गया। छठवें दिन फेफड़े पूरी तरह काले हो गए। उनके मुताबिक. दिवाली पर प्रदूषण में हुई बढ़ोतरी के कारण यह तेजी से डैमेज हुए।

Jhatkaa,org की शिखा कुमार के मुताबिक यह इंस्टॉलेशन उनके प्रोजेक्ट का हिस्सा था जो कि पहले शुरू हुआ था जिसमें उन्होंने कई शहरों में छोटे-छोटे फेफड़ों को इंस्टॉल किया था। जब ये फेफड़े प्रदूषण के कारण प्रभावित होते थे तो इन्हें कई राजनेताओं और साथ ही विभिन्न राज्यों के पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड

को भेजे जाते थे।

सुप्रीम कोर्ट के केवल दो घंटे पटाखे फोड़ने की छूट देने के बावजूद इस दिवाली पर दिल्ली में 50 लाख किलोग्राम के पटाखों के फोड़े जाने का अनुमान है।

दिल्ली के आनंद विहार और मेजर ध्यान चंद नेशनल स्टेडियमें एयर क्वालिटी इंडेक्स 999 रिकॉर्ड किया गया और चाणक्य पुरी के आसपास 459 रिकॉर्ड किया गया जो कि खतरे की श्रेणी में आते हैं।