नई दिल्ली। पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर आतंकी अटैक के बाद सत्तारुढ़ दल ने ऑल पार्टी मीटिंग बुलाई है। मीटिंग में आंतकी हमले और उसके बाद की योजना पर चर्चा होने की संभावना है। पुलवामा हमले में 40 सैनिकों को जान गंवाना पड़ी थी और कईं लोग घायल हो गए हैं।

ऑल पार्टी मीटिंग का आयोजन शनिवार को होगा। पीएम मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार में यह पहला मौका है जब इस तरह के हमले के बाद सभी राजनीतिक दलों की मीटिग बुलाई गई है। मीटिंग में आंतक को करारा जवाब देने के लिए सहमति बनाने कि कोशिश की जाएगी।

पठानकोट, उरी और नागरोटा हमले के बाद यह पहला मौका है जब सत्तापक्ष आतंक के खिलाफ ठोस कदम उठाने के लिए आम सहमति की कोशिश कर रहा है। इसके पहले ऑल पार्टी मीटिंग का आयोजन सितंबर 2016 में किया गया था। उस वक्त सर्जिकल स्ट्राइक होने के बाद सभी पार्टियों की बैठक बुलाकर उनको इसकी सूचना दी गई थी। इस मीटिंग की खास बात यह है कि सरकार इसके जरिए पाकिस्तान के खिलाफ कठोर कदम उठाने के लिए आम सहमति की तरफ कदम बड़ा रही है।

इससे पहले केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली ने सुरक्षा मामलों की कैबिनेट मीटिंग के बाद कहा कि पाकिस्तान से मोस्ट फेवर नेशन के दर्जा वापस ले लिया गया है और इस बात के पुख्ता सबूत है कि इस हमले के पीछे पाकिस्तान का हाथ है। हमले को अंजाम देने वाले आतंकी संगठन जैश ए मोहम्म्द का ठिकाना पाकिस्तान में है।

पुलवामा हमले के बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रेस कांफ्रेस में कहा था कि आतंकी हमले की इस मुश्किल घड़ी में हम सरकार और जवानों का समर्थन करते हैं। उन्होंने इस मामले में किसी भी तरह की राजनीति करने से इंकार किया है और कहै कि यह समय देश के साथ खड़े होने का है।