नई दिल्ली। दिल्ली में एलजी और मुख्यमंत्री के बीच जारी विवाद आगे बढ़ गया है और अब यह मामला तीन जजों की बेंच के पास भेज दिया गया है। गुरुवार को इस मामले में हुई सुनवाई के दौरान दो जजों की बेंच के दोनों जजों के बीच मतभेद थे और ऐसे में यह मामला अब तीन जजों की बेंच को भेज दिया गया है।

दोनों जज दिल्ली सरकार और केन्द्र के बीच अधिकारियों की तैनाती, तबादले और नियंत्रण तथा भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) के क्षेत्राधिकार को लेकर एकमत से फैसला नहीं ले पाए और इस बजह से इसमें फिलहाल ना तो किसी की जीत हुई है और ना किसी की हार।

फैसला सुनाने के दौरान जस्टिस सिकरी ने जॉइंट सेक्रेटरी और उसके ऊपर के अफसरों के ट्रांसफर और पोस्टिंग का अधिकार एलजी के पास होगा वहीं बचे हुए दिल्ली सरकार के अंतर्गत आएंगे। हालांकि, मतभेद के मामले में एलजी की राय महत्वपूर्ण होगी। वहीं एसीबी एलजी के अधिकार क्षेत्र में आएगा।

जस्टिस सिकरी ने आगे कहा कि जीएनसीडीटी, पब्लिक प्रॉसीक्यूटर की नियुक्ति कर सकेंगे वहीं जांच आयोग एलजी के अधिकार में है। दिल्ली बिजली बोर्ड राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में आएगा।

वहीं जस्टिस अशोक भूषण का मत इसके विपरित था और उनका कहना था कि सर्विसेस के तहत अधिकारियों की ट्रांसफर पोस्टिंग दिल्ली सरकार के अंतर्गत आती है।

सर्वोच्च अदालत ने एक नवंबर को दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ केजरीवाल सरकार की याचिकाओं पर सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। वैसे तो केंद्र और दिल्ली सरकार के संवैधानिक अधिकारों की व्याख्या पर सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ गत 4 जुलाई को फैसला सुना चुकी है। उस फैसले में कोर्ट ने चुनी हुई सरकार को प्राथमिकता दी थी।

कोर्ट ने कहा था कि उपराज्यपाल मंत्रिमंडल की सलाह से काम करेंगे। मतांतर होने पर वे मामले को फैसले के लिए राष्ट्रपति को भेज सकते हैं। लेकिन स्वतंत्र रूप से कोई निर्णय नहीं ले सकते। वह दिल्ली के प्रशासनिक मुखिया जरूर हैं लेकिन उनके अधिकार सीमित हैं। संविधान पीठ के फैसले के बाद दिल्ली की आप सरकार को कई मामलों में निर्णय लेने की छूट मिल गई थी। लेकिन ट्रांसफर पोस्टिंग आदि से जुड़े सर्विस के मामलों पर अभी फैसला होना है।

केंद्र सरकार ने 21 मई, 2015 को अधिसूचना जारी कर पब्लिक आर्डर, पुलिस और भूमि के अलावा सर्विस मामलों का क्षेत्राधिकार भी उपराज्यपाल को सौंप दिया था, जिसके खिलाफ दिल्ली सरकार की अपील सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। एसीबी में दिल्ली सरकार के अधिकारों में कटौती वाली केंद्र की 23 जुलाई, 2015 की अधिसूचना को चुनौती देने वाली अपील भी लंबित है।

हाई कोर्ट ने दोनों ही मामलों में दिल्ली सरकार की याचिकाएं खारिज कर दीं थीं। इसके अलावा दिल्ली सरकार की सात और अपील अभी लंबित हैं जिनमें तीन मामले कमिशन ऑफ इन्क्वायरी के हैं और एक सीएनजी से जुड़ा है। दिल्ली सरकार की अपील पर जस्टिस एके सीकरी और जस्टिस अशोक भूषण की पीठ ने विस्तृत सुनवाई के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। इस महीने की सात तारीख को दिल्ली सरकार ने अदालत से जल्द फैसला सुनाने का अनुरोध किया था।