नोएडा। ईद से ठीक पहले नोएडा के जेपी हॉस्पिटल में हिंदू-मुस्लिम भाईचारे की अनूठी मिसाल पेश हुई है। यहां हिंदू मरीज को मुस्लिम मरीज की पत्नी ने और मुस्लिम मरीज को हिंदू मरीज की पत्नी ने किडनी देकर उनकी जान बचाई।

जेपी हास्पिटल के सीनियर ट्रांसप्लांट सर्जन डॉ अमित देवरा ने बताया कि दोनों मरीजों की जांच करने पर उनमें क्रोनिक किडनी रोग पाया गया था। इसके बाद उन्हें रीनल एलोग्राफ्ट ट्रांसप्लांट के लिए जेपी हॉस्पिटल में भर्ती किया गया। सर्जरी के बाद दोनों डोनर और मरीज ठीक हैं।

डोनर्स बालो और लीला को सर्जरी के कुछ दिन बाद ही छुट्टी दे दी गई। वहीं, मरीज इकरम और अनिल को ट्रांसप्लांट के 12 दिनों के बाद छुट्टी दी गई।

अस्पताल के सीनियर नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ अनिल प्रसाद ने बताया कि 53 वर्षीय इकरम और 43 वर्षीय अनिल कुमार राय की किडनी हाई ब्लड प्रेशर के कारण खराब हो गई थीं। दोनों की जिदगी खतरे में थीं क्योंकि दोनों परिवारों को सही डोनर नहीं मिल रहा था। हमने दोनों परिवारों के साथ अलग-अलग मीटिग की और किडनी स्वैप के बारे में पूरी जानकारी दी। आखिरकार दोनों की पत्नियां एक दूसरे के पति को किडनी देने के लिए तैयार हो गईं।

मरीज अनिल कुमार ने बताया कि जनवरी में पेट में तेज दर्द होने लगा था और भूख नहीं लगती थी। इसके बाद हम इलाज के लिए गोरखपुर से दिल्ली जेपी हॉस्पिटल आ गए। जांच करने पर डॉक्टरों ने हमें स्वैप ट्रांसप्लांट के बारे में बताया।

मुजफ्फरनगर से आए मरीज इकरम ने बताया कि उन्हें बी-पॉजिटिव ब्लड ग्रुप की किडनी चाहिए थी, लेकिन उनकी पत्नी का ब्लड ग्रुप ए-पॉजिटिव था। डॉक्टरों ने उन्हें अनिल के परिवार से मिलवाया और स्वैप ट्रांसप्लांट का सुझाव दिया और हम तुरंत इस पर सहमत हो गए। जब आप मौत के दरवाजे पर खड़े होते हैं तो डोनर का धर्म आपके लिए कोई मायने नहीं रखता।