आज राष्ट्रीय युवा दिवस है- स्वामी विवेकानंद की जयंती। विवेकानंद भारत देश के साथ वैश्विक चेतना के स्रोत हैं। उन्होंने युवाओं को पारंपरिक मूल्यों के साथ-साथ अपने नए समय को समझने के लिए प्रेरित किया। वे उन लोगों में थे जिन्होंने भारत की प्राचीनता को वैज्ञानिक व आधुनिक दृष्टि से आविष्कृत किया तथा हमारे भीतर अपने समाज व संस्कृति के प्रति आत्मविश्वास उत्पन्न् किया। सनातन संस्कृति की अच्छाइयों को ग्रहण करने के साथ सभी धर्मों के प्रति सामंजस्य का भाव उकेरा। उनका हिन्दू धर्म क्रांतिसंभव था। समाज के दमित-शोषित तबके के पक्ष में उन्होंने कहा कि उनकी वाजिब जगह दे दो, वरना वे स्वयं विद्रोह करके ले लेंगे। उनकी निगाह अंतिम आदमी पर थी। शायद वास्तविक धर्म यही है। युवाओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि फुटबॉल व गीता में चुनना हो तो वे फुटबॉल चुनें। उनकी दृष्टि में एक स्वस्थ शरीर व मन वाला ही युवा होता है। वे किसी की प्रतिलिपि होने के बदले 'खुद जैसा होने को मान देते थे, इसीलिए उन्होंने कहा- 'लोग मुझ पर इसलिए हंसते हैं कि मैं उनसे अलग हूं और मैं उन पर इसलिए हंसता हूं कि सब एक जैसे ही हैं। वे आस्तिक होने का अर्थ अपने में विश्वास बताते थे। उन्होंने भारत के लोगों को अरब के मुसलमानों से साफ-सफाई और स्वच्छता सीखने को कहा था, जो रेगिस्तानी कारवां में भी अपने खाने पर धूल नहीं पड़ने देते। नवंबर, 1894 में न्यूयॉर्क से अलासिंगा पेरुमल को वे चिट्ठी में लिखते हैं- 'अन्न्! अन्न्! मुझे इस बात का विश्वास नहीं है कि वह भगवान जो मुझे यहां पर अन्न् नहीं दे सकता, वह स्वर्ग में मुझे अनंत सुख देगा। राम कहो! भारत को उठाना होगा, गरीबों को खिलाना होगा, शिक्षा का विस्तार करना होगा और पौरोहित्य की बुराइयों को ऐसा धक्का देना होगा कि वे चकराती हुई एकदम अटलांटिक महासागर में जाकर गिरें।

युवाओं को उचित मार्गदर्शन की आवश्यकता है। जैसे-जैसे वे बड़े होते हैं, उनकी अलग-अलग जरूरतें होती हैं। उनके माता-पिता और अभिभावकों की जिम्मेदारी है कि वे संवेदनशील हों और जरूरत पड़ने पर मदद का हाथ बढ़ाएं। युवा उन समूहों से सहायता प्राप्त कर सकते हैं, जो उन्हें उनकी पूरी क्षमता तक पहुंचने में मदद करते हैं। साथ ही उन्हें हर एक चीज में मार्गदर्शन करने का भी मौका दें। अपने जीवन के हर मिनट का आनंद लेना सीखें। अपने समय में खुश रहने का प्रयत्न करें। भविष्य में खुश रहने के लिए खुद के बाहर किसी चीज का इंतजार न करें। सोचें कि आपके पास खर्च करने के लिए कितना कीमती समय है, चाहे वह काम पर हो या आपके परिवार के साथ। हर मिनट का आनंद और स्वाद लेना चाहिए। अपना जीवन आज बदलें। भविष्य पर जुआ ना खेलें। बिना देर किए अपने सपनों पर कार्य आरंभ करें। अपनी खुद की आशा बनाएं। अपना प्यार खुद रचें। अतीत को बदला नहीं जा सकता। युवा हमारे देश के भविष्य के नायक होंगे। नायक और अच्छे नागरिक बनने के लिए एक अच्छी और मजबूत नींव की जरूरत होती है। देश व बाहर के संघर्षों की खबरें आए दिन छपती रहती हैं। नए समय में परिवार बिखर रहे हैं। तलाक बढ़ रहे हैं। इंटरनेट पर सर्फिंग के लिए खर्च किए गए अनचाहे घंटों में ओवर एक्सपोजर युवाओं को नए माध्यमों पर पुनर्दृष्टि के लिए बाध्य कर रहा है। ड्रग्स और शराब का सेवन एक निरंतर खतरा है और कई युवा पहले से ही इसमें शामिल हैं।

देशभक्ति की भावना से कार्य करना युवाओं के सराहनीय गुण हैं। भारतीयता की अच्छाइयों को ग्रहण करते ही युवाओं में सत्य, देशभक्ति, अखंडता, बहादुरी, लचीलापन और सहयोगवृत्ति आदि गुण स्वाभाविक रूप से आने लगते हैं। कोई भी युवा जो इस महान देश में रहता है, वह यहां के सांस्कृतिक वैभव से गौरवान्वित महसूस करेगा। अपने देश की धरती के प्रति विश्वास युवाओं को निष्ठाशील बनाता है। वीरता, जो हर युवा का गुण है, को ग्रहण करते हुए जब उसे लगता है कि उनकी शानदार मातृभूमि को खतरा है तो वह खतरे का सामना करने के लिए दृढ़ता से खड़ा हो जाता है। युवा साहसपूर्वक एक साथ काम कर सकते हैं तथा उत्साह के साथ देश की समस्याओं को हल करने की ओर अग्रसर हों। हमारे देश की वर्तमान व भविष्य दृष्टि हमारे युवाओं के हाथ में है। वे जबर्दस्त और विशाल आकांक्षाओं से परिपूर्ण हैं। यदि इन युवाओं को अपनी प्रतिभा का उपयोग करने का अवसर दिया जाएगा तो यह मानव संसाधनों का बड़ा निवेश होगा। हमारी इस खूबसूरत भूमि को उज्जवल बनने के लिए युवाओं की आवश्यकता है।

कल के बेहतर नागरिक बनने के लिए युवाओं की प्राथमिक भूमिका एक अच्छी शिक्षा प्राप्त करना है। उन्हें उस काम को करने के लिए कौशल सीखने की जरूरत है, जो उनके देश की अर्थव्यवस्था को चाहिए। उन्हें यह जानने की भी जरूरत है कि उनके अपने देश के सामान्य जन के बारे में जानने तथा लिखने, सोचने, समझने, विश्लेषण करने और उन मुद्दों पर चर्चा करने के लिए कैसे अपनी तैयारी करें। राष्ट्र की पूरी सफलता युवाओं पर निर्भर करती है। निरंतर सफलता के लिए आधुनिक युग के ज्ञान से लैस युवाओं को उचित सुविधाएं प्रदान करना व्यवस्था की जिम्मेदारी है।

युवाकाल जीवन का वसंत है। यह खोज और सपनों का युग है। उसमें राष्ट्र को बेहतर रूप में बदलने की शक्ति है। युवा अपने साथी नागरिकों को सही दिशा में ले जाने की क्षमता रखते हैं। युवा समाज की कुरीतियों के सहज प्रतिरोधक हैं। वे समाज में अपनी पहचान, समानता, आवास, शिक्षा, रोजगार , संपन्न्ता के लिए संघर्ष करते तथा समाज की कुरीतियों व अन्य समस्याओं से लड़ते हैं। नस्ल, पंथ, भाषा, क्षेत्र, विचारधारा आदि की कट्टरता से भी वे जूझते हैं। युवाओं को अवसरों से भरी दुनिया की उम्मीद है, इसलिए खुले व श्रेष्ठ दिमाग से वे जीत सकते हैं और बेहतर इंसान बन सकते हैं। उन्हें सकारात्मक तरीके से संघर्ष को संभालने के लिए नैतिकता और मूल्यों की आवश्यकता होती है। विवेकानंद जयंती पर इस महासंत को याद करते हुए युवा उनके इस विचार पर चल सकते हैं- 'जीवन में एक समय में एक लक्ष्य निर्धारित करो और जिस काम को करने का संकल्प लो, उसे पूरे जी-जान से करो। उस समय अन्य सभी कामों को भूल जाओ।

भविष्य उन युवाओं का है जो अपने सपनों की सुंदरता में विश्वास करते हैं। खुशी कोई ऐसी चीज नहीं है, जिसे आप भविष्य के लिए टाल दें। यह वो सौगात है जिसे आप वर्तमान के लिए डिजाइन करते हैं। कल की सबसे अच्छी तैयारी 'आज आपकी पूरी कोशिश है। अपने अंधेरे क्षणों के दौरान युवाओं को प्रकाश की ओर देखने के लिए अपना ध्यान केंद्रित करना चाहिए। हवा का रुख युवा बदल सकते हैं। यदि यह संभव न हो तो अपने पालों को अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए समायोजित कर सकते हैं। युवा अपने दिल, दिमाग और आत्मा को पहले अवपे छोटे-छोटे कामों में लगाएं। यहीं से वे बड़े कामों की ओर बढ़ेंगे। यही सफलता का रहस्य है। जीवन में किसी युवा का मिशन केवल जीवित रहना नहीं, बल्कि रोमांचपूर्ण ढंग से सक्रिय रहना है- कुछ जुनून, कुछ करुणा, कुछ हास्य और कुछ अपनी विशिष्ट शैली के साथ।

(लेखक ललित निबंधकार एवं सांस्कृतिक विचारक हैं)