'अग्नि-5" के सफल प्रक्षेपण के साथ भारत वास्तविक अर्थों में मिसाइल महाशक्ति बन गया है। 2011 और 2012 में इस मिसाइल के दो सफल परीक्षण हुए थे। तीसरी बार भी इसके कामयाब रहने के बाद अब इसके कारगर होने में कोई शक नहीं बचा है। इसीलिए शनिवार को हुए प्रक्षेपण के बाद कहा गया कि भारत ने अपनी सुरक्षा का परमाणु कवच अब पूरी तरह तैयार कर लिया है।

उल्लेखनीय है कि 'अग्नि-5" अंतर-महाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल है, जिसे परमाणु हथियारों से लैस किया जा सकता है। इस सफलता के साथ रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) अग्नि श्रृंखला की मिसाइलों को विकसित करने के क्रम में एक विशिष्ट मुकाम पर पहुंच गया। 'अग्नि-1" के साथ भारत ने 700 किलोमीटर दूरी तक मार करने की क्षमता प्राप्त की थी, जो 'अग्नि-5" के साथ 5000 किलोमीटर हो गई है।

यानी अब भारत पूरब में चीन के किसी भी हिस्से और पश्चिम में लगभग पूरे यूरोप के ठिकानों पर निशाना साध सकता है। साथ ही कोई भारत पर परमाणु हमला करता है तो 'अग्नि-5" के जरिए वह तुरंत जवाबी आक्रमण करने की स्थिति में होगा। 17 मीटर लंबी ये मिसाइल 1000 किलोग्राम परमाणु अस्त्र को ढोने और बंदूक की गोली से भी ज्यादा तेज गति से चलने में सक्षम है। चूंकि इसमें कई आधुनिकतम तकनीकें लगी हैं, अत: इनके जरिए रक्षा सेनाओं को अभूतपूर्व ताकत मिलेगी। इंजन की शक्ति, दिशा की तलाश और अस्त्र दागने की क्षमताओं के लिहाज से भारत में अब तक बनी तमाम मिसाइलों से यह अधिक उन्न्त है। विशेषकर इसके रिंग लेजर ग्रियो आधारित नेविगेशन सिस्टम और माइक्रो नेविगेशन सिस्टम खास चर्चित हुए हैं। इन प्रणालियों के जरिए ये मिसाइल लगभग सटीक निशाना साध सकेगी।

जाहिर है, भारत के दुश्मनों के लिए यह बुरी खबर है। लेकिन भारतवासी अब अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर कहीं अधिक निश्चिंत हो सकते हैं। वे गर्व भी कर सकते हैं क्योंकि इसे पूरी तरह देशी संसाधनों और मेधा से विकसित किया गया है। इस सफलता का पूरा श्रेय भारत के रक्षा वैज्ञानिकों को दिया जाना चाहिए। यह उनके ही प्रयासों का परिणाम है कि भारत जल से लेकर धरती और आसमान तक अपनी हिफाजत के लिए अपने पैरों पर खड़ा हो सका है। अग्नि श्रृंखला की मिसाइलों के अलावा भारत के तरकश में 'पृथ्वी", 'आकाश", 'नाग" व 'त्रिशूल" जैसे प्रक्षेपास्त्र भी हैं। इन सबकी अलग-अलग क्षमताएं हैं और उन्हें खास-सुपरिभाषित उद्देश्यों से तैयार किया गया है।

'अग्नि-5" उनके बीच सबसे उन्नत है। शनिवार को ओडिशा के तट पर उसे कनस्तर से प्रक्षेपित किया गया। यानी अब भारत इसमें सक्षम है कि वह अपनी सीमा के भीतर किसी स्थल से इतनी उन्न्त मिसाइल को दाग सकता है। जाहिर है, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस वक्तव्य से पूरा राष्ट्र सहमत होगा कि ये मिसाइल हमारी सेनाओं के लिए बहुमूल्य परिसंपत्ति सिद्ध होगी। भविष्य में हमारी सुरक्षा में उसकी खास भूमिका रहेगी।