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    संपादकीय : इसरो की नई उड़ान

    Published: Fri, 12 Jan 2018 08:16 PM (IST) | Updated: Sat, 13 Jan 2018 04:03 AM (IST)
    By: Editorial Team
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    साल 2018 के आरंभ में ही भारत ने अंतरिक्ष में एक नई कीर्ति पताका लहराई है। शुक्रवार सुबह भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने पीएसएलवी-सी40 के जरिए कार्टोसैट-2 श्र्ाृंखला के उपग्रह का सफल प्रक्षेपण किया। इसके साथ ही इसरो ने अपने उपग्रहों को प्रक्षेपित करने का शतक पूरा कर लिया। शुक्रवार को छोटे-बड़े कुल 31 उपग्रह प्रक्षेपित किए गए। यह उच्च कौशल का काम था। सूक्ष्म एवं अति-सूक्ष्म उपग्रहों में से आधे इसरो ने अमेरिका के लिए छोड़े। बाकी ऐसे उपग्रह भारत, फिनलैंड, कनाडा, फ्रांस, दक्षिण कोरिया और ब्रिटेन के हैं। इस कामयाबी से देश का नाम और रोशन हुआ है।

    यह सचमुच बड़े गर्व की बात है कि आज सर्वाधिक विकसित देश भी अपने उपग्रहों को इसरो से प्रक्षेपित करवाना फायदेमंद और सुरक्षित मानते हैं। भारत की ये महान उपलब्धि है। पाकिस्तान इस पर दुखी है, तो इसमें अचरज की कोई बात नहीं है। अपनी ईर्ष्या का इजहार उसने पीएसएलवी-सी40 के प्रक्षेपण से ठीक पहले किया। पाक विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बेवजह अंदेशा जताया कि भारत नए उपग्रहों का उपयोग सैन्य उद्देश्यों से कर सकता है, जिससे क्षेत्रीय सामरिक स्थिरता भंग होगी। स्पष्टत: ये बेसिरपैर की बात है। भारत ने कभी अंतरिक्ष तकनीक का फौजी उपयोग करने की नहीं सोची। लेकिन हमारा पड़ोसी पाकिस्तान कभी लड़ाई-भिड़ाई की सोच से उबर नहीं पाता।

    बहरहाल, उसकी प्रतिक्रिया इसकी पुष्टि है कि भारत ने ऐसी सफलता प्राप्त की है, जिससे उसके शत्रु परेशान हैं। चार महीने पहले पीएसएलवी का पिछला प्रक्षेपण (सी39) नाकाम हो गया था। लेकिन सी40 को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में पहुंचाकर इसरो के विज्ञानियों ने यह जाहिर किया कि उनका आत्मविश्वास आज भी बुलंदियों पर है। प्रक्षेपण तकनीक बहुत जटिल, बारीक और चुनौतीपूर्ण मानी जाती है। किसी एजेंसी को इससे जुड़े ठेके तभी मिलते हैं, जब उसकी सफलता की दर अत्यंत ऊंची हो और उसकी क्षमता संदेह से परे हो। इसीलिए इसरो के ताजा प्रयास का कामयाब होना बेहद जरूरी था। इस संगठन के वैज्ञानिकों और कर्मचारियों के लिए ये कामयाबी इसलिए भी खास थी, क्योंकि इसके जरिए उन्होंने अपने निवर्तमान अध्यक्ष एएस किरण कुमार को यथायोग्य विदाई दी। तीन साल के कार्यकाल के बाद कुमार इस प्रतिष्ठित संस्था का नेतृत्व के. शिवन को सौंपेंगे। स्पष्टत: किरण कुमार ने नए अध्यक्ष के सामने अनुपालन के लिए बेहद ऊंचे मानदंड रखे हैं। आने वाले दिनों में इसरो को कई बड़े प्रक्षेपण करने हैं। 2018 में इसरो को औसतन हर महीने एक उपग्रह का प्रक्षेपण करना है। जीएसएलवी से अंतरिक्ष संबंधी कारोबार में भारत की भूमिका और मजबूत होगी। उसके दो साल बाद एसएसएलवी श्र्ाृंखला की शुरुआत हो सकती है। चंद्रमा और मंगल ग्रह के लिए भारत के नए अभियान भी इस दौर में शुरू होंगे। आज हर भारतवासी इस आत्मविश्वास से ओतप्रोत है कि इसरो इन सबमें सफल होगा और उपग्रह एवं रॉकेट छोड़ने के क्षेत्र में वह दुनिया की नंबर एक एजेंसी बन सकेगा।

    और जानें :  # ISRO # 100th satellite # Cartosat-2
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    • subhash15 Jan 2018, 12:49:23 PM

      संपादकीय : इसरो की नई उड़ान Fri, 12 Jan 20181969 में अपनी स्थापना के बाद इसरो ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। उसने अंतरिक्ष में छलांग लगाना शुरू किया और साल दर साल तमाम देशी और विदेशी सैटलाइट को अंतरिक्ष में पहुंचाकर नई ऊंचाइयां छूता गया। बीच-बीच में उसे असफलताएं भी मिलीं लेकिन उसके वैज्ञानिकों ने नाकामयाबी से भी सबक लिए और आगे बढ़ते गए। उसी का नतीजा है कि आज भारत अंतरिक्ष में एक बड़ी ताकत बन गया है। सैटलाइट्स और अंतरिक्ष यानों में वह अमेरिका, रूस और चीन को टक्कर दे रहा है। आज तमाम विकसित देश अपने उपग्रहों को इसरो से प्रक्षेपित करवाना फायदेमंद और सुरक्षित मानते हैं। दरअसल, इसरो भारतीय वैज्ञानिकों की अटूट निष्ठा और लगन का एक उदाहरण है,!-सुभाष बुड़ावन वाला18,शांतीनाथ कार्नर,खाचरौद,,,,

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