वस्तु एवं सेवा कर यानी जीएसटी के तहत 15 अप्रैल से पांच और राज्यों में राज्य के भीतर ही माल ढुलाई के लिए ई-वे बिल सिस्टम लागू करने की तैयारी यह बताती है कि कर्नाटक में इस सिस्टम के अमल का प्रायोगिक परीक्षण सफल रहा। इसके बावजूद सरकारी तंत्र को इसके लिए सचेत रहना होगा कि पांच राज्यों में इस व्यवस्था के अमल में किसी तरह की बाधा न खड़ी होने पाए, क्योंकि तभी वह जल्द से जल्द अन्य राज्यों में ई-वे बिल सिस्टम लागू करने में समर्थ हो सकेगी। राज्यों के भीतर ही माल ढुलाई के लिए ई-वे बिल व्यवस्था को लागू करने की तैयारी इसकी भी सूचक है कि एक से दूसरे राज्यों के बीच माल ढुलाई में इस व्यवस्था को लागू करने के सकारात्मक नतीजे हासिल हुए हैं। चूंकि ई-वे बिल सिस्टम का उद्देश्य माल ढुलाई के पुराने तौर-तरीकों के जरिए की जाने टैक्स चोरी को रोकना है, इसलिए कारोबार जगत के लिए भी यह आवश्यक है कि वह पारदर्शी व्यवस्था का हिस्सा बने। कारोबार जगत से ऐसे ही सहयोग की अपेक्षा जीएसटी के अन्य नियमों के पालन के मामले में भी है, क्योंकि ऐसे प्रसंग सामने आ रहे हैं, जो यह इंगित करते हैं कि जीएसटी की चोरी जारी है। इसकी अनदेखी नहीं की जा सकती कि कंपोजिशन स्कीम के जरिये व्यापक स्तर पर टैक्स चोरी की आश्ांका को देखते हुए जीएसटी काउंसिल 'रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म" जल्द से जल्द लागू करना चाह रही है। उम्मीद है कि जीएसटी काउंसिल की आगामी बैठक में इस पर कोई सहमति बन जाएगी। यदि 'रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म" अमल में आए तो यह टैक्स चोरी रोकने का एक और जतन होगा। विडंबना यह है कि ऐसे कुछ और जतन किए जाने की जरूरत महसूस की जा रही है और इसका कारण यही है कि कारोबार जगत का एक हिस्सा छल-छद्म से टैक्स बचाने से बाज नहीं आ रहा है।


यह सही है कि जीएसटी का तंत्र अभी भी कई जटिलताओं से लैस है, लेकिन यह ठीक नहीं कि एक ओर जटिल प्रावधानों की शिकायत की जाए और दूसरी ओर टैक्स बचाने-छिपाने का काम भी किया जाए। ऐसा होगा तो फिर जीएसटी काउंसिल भी व्यवस्था के छिद्र भरने हेतु नए-नए उपाय तलाशने को विवश होगी। जीएसटी काउंसिल डाल-डाल तो टैक्स बचाने वाले पात-पात, ऐसा कोई माहौल कारोबार जगत के लिए ठीक नहीं। यह किसी से छिपा नहीं कि जुलाई-दिसंबर के बीच जीएसटी नेटवर्क में फाइल रिटर्न्स की छानबीन के दौरान यह संदेह उपजा कि कारोबारियों ने करीब 34 हजार करोड़ रुपए की टैक्स देनदारी छिपा ली। इसी तरह चंद दिनों पहले अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड ने देशभर में छापामारी करके सौ से ज्यादा प्रतिष्ठानों में चार सौ करोड़ रुपए की जीएसटी चोरी का पता लगाया। इन प्रतिष्ठानों ने जीएसटी वसूल तो लिया, लेकिन उसे सरकारी खजाने में जमा नहीं कराया। नि:संदेह जीएसटी को और सुगम बनाने व सही तरह से टैक्स दे रहे कारोबारियों को प्रोत्साहित करने की जरूरत है, लेकिन इसी के साथ टैक्स चोरी की प्रवृत्ति पर लगाम लगाने की भी जरूरत है।