पटना। लोकसभा चुनाव इस बार सात चरणों में आयोजित किया जा रहा है। 11 अप्रैल को पहले चरण का मतदान होने के बाद 18 अप्रैल गुरुवार को दूसरे चरण के लिए मतदान होने जा रहा है। दूसरे चरण में 13 राज्यों की 96 सीटों पर वोटिंग होना है। दूसरे चरण में बिहार की पांच सीटों किशनगंज, कटिहार, पूर्णिया, भागलपुर और बंका सीट पर भी मतदान हो रही है। इन सीटों पर प्रत्याशियों के बीच जोरदार घमासान होने की संभावना जताई जा रही है।

किशनगंज सीट पर है त्रिकोणीय मुकाबला

किशनगंज मुस्लिम बहुल इलाका होने की वजह से इस लोकसभा सीट पर मुस्लिम मतदाता हमेशा निर्णायक रहे हैं। पूर्वोत्तर राज्य का गेटवे कहलाने वाले इस इलाके में लोकसभा चुनाव हमेशा रोचक रहे हैं। इस बार कांग्रेस को जहां अपनी सीट बचाने की चुनौती है, वहीं जदयू के लिए भी यह सीट प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गई है।

किशनगंज लोकसभा सीट पर इस बार कुल 14 प्रत्याशी मैदान में हैं। जदयू ने इस बार सैयद महमूद अशरफ को मैदान में उतारा है, वहीं कांग्रेस ने डॉ. मोहम्मद जावेद और एमआईएम ने अख्तरुल ईमान को टिकट दिया है। तृणमूल कांग्रेस की ओर से जावेद अख्तर उम्मीदवार बनाए गए हैं। हालांकि माना जा रहा है कि मुख्य मुकाबला जदयू, कांग्रेस और एमआईएम के प्रत्याशियों के बीच ही होगा।

साल 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में इस सीट से कांग्रेस प्रत्याशी मौलाना असरारुल हक ने भाजपा के डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल को 1 लाख 90 हजार से ज्यादा वोटों से हराया था।

कटिहार सीट पर अल्पसंख्यक उम्मीदवार का रहा है दबदबा

लोकसभा चुनाव के दूसरे चरण में 18 अप्रैल को बिहार की कटिहार सीट पर भी मतदान होना है। इस बार इस लोकसभा सीट पर 9 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। इस सीट को वर्तमान सांसद तारिक अनवर का गढ़ भी माना जाता रहा है। इस बार भी इसी सीट से तारिक अनवर बतौर उम्मीदवार मैदान में हैं। वे इस सीट से पांच बार सांसद रह चुके हैं।

पिछली बार एनसीपी के टिकट पर चुनाव लड़ने वाले तारिक इस बार कांग्रेस से प्रत्याशी के तौर पर मैदान में हैं। तारिक का मुकाबला जनता दल यू के दुलाल चंद्र गोस्वामी से है। वहीं इस बार एनसीपी ने मुहम्मद शाकुर को तो बसपा ने शिवनंदन मंडल को मैदान में उतारा है।

2014 के चुनाव में एनसीपी से चुनाव लड़ने वाले तारिक अनवर ने अपने प्रतिद्वंदी भाजपा के निखिल कुमार चौधरी को एक लाख से ज्यादा वोटों से हराया था। भाजपा जदयू में गठबंधन होने के बाद इस सीट से भाजपा ने इस बार अपना उम्मीदवार नहीं उतारा है।

पूर्णिया सीट पर निर्णायक हैं मुस्लिम मतदाता

बिहार की पूर्णिया लोकसभा सीट पर मुस्लिम वोटर्स हमेशा निर्णायक रहे हैं। इस संसदीय क्षेत्र में 6 विधानसभा सीटें आती हैं। पिछली बार यह सीट जदयू के खाते में गई थी। इस बार इस सीट से 13 प्रत्याशी मैदान में हैं। मुख्य मुकाबला जनता दल युनाइटेड के संतोष कुमार और कांग्रेस से उम्मीदवार बनाए गए उदय प्रताप सिंह के बीच होने की संभावना है।

प्रताप सिंह पिछली बार इसी सीट से भाजपा के उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़े थे, जिन्हें जदयू के प्रत्याशी संतोष कुमार कुशवाहा ने 1 लाख से ज्यादा वोटों से हराया था। इस सीट से इस बार बसपा ने जितेंद्र उरब को टिकट दिया है। इस सीट की तासीर रही है कि यहां के मतदाता समय समय पर अपना प्रतिनिधि बदलते रहे हैं।

भागलपुर सीट पर है रोमांचक मुकाबला

भागलपुर लोकसभा सीट पर इस बार एनडीए और महागठबंधन के बीच रोचक मुकाबला है। इस बार इस सीट से 9 प्रत्याशी मैदान में हैं। एनडीए से जदयू प्रत्याशी अजय कुमार मंडल और महागठबंधन से राजद के शैलेष कुमार उर्फ बुलो मंडल के बीच में मुख्य मुकाबला है।

इस सीट पर कांटे की टक्कर का इसी बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि इन दोनों प्रत्याशियों के पक्ष में अब तक एक दर्जन से ज्यादा सभाएं हो चुकी हैं। भागलपुर संसदीय क्षेत्र में 6 विधानसभा सीटें हैं। इसमें 21 लाख 40 हजार मतदाता उम्मीदवार की किस्मत का फैसला करेंगे।

साल 2014 में इस सीट पर राजद के बुलो मंडल ने बेहद नजदीकी मुकाबले में भाजपा के शाहनवाज हुसैन को लगभग नौ हजार वोटों से हराया था।

बांका लोकसभा सीट पर जदयू,राजद और बागी प्रत्याशी के बीच मुकाबला

बांका लोकसभा सीट पर इस बार वैसे तो 20 उम्मीदवार मैदान में हैं, लेकिन यहां त्रिकोणीय मुकाबला होने की उम्मीद ही की जा रही है। भाजपा की बागी निर्दलीय प्रत्याशी पुतुल कुमार ने मुकाबला दिलचस्प बना दिया है। भगवान मंदार मधुसूदन की धरती कहलाने वाली बांका सीट पर कांटे का मुकाबला होने की संभावना है। इस बार जदयू ने गिरधारी यादव को टिकट दिया है तो वहीं राजद ने जयप्रकाश नारायण यादव को अपना उम्मीवार बनाया है।

साल 2014 में हुए चुनाव में इस सीट पर राजद ने अपना कब्जा जमाया था। यहां से वर्तमान सांसद जयप्रकाश नारायण यादव ने भाजपा की पुतुल देवी को लगभग 10 हजार वोटों से मात दी थी। बांका सीट पर यादव वोटर्स निर्णायक हैं, यहां लगभग तीन लाख यादव वोटर्स हैं, जिन्हें राजद अपना वोटबैंक मानता है।

इसके अलावा राजपूत, ब्राह्मण, कायस्थ और भूमिहार वोटर्स भी लगभग साढ़े तीन लाख हैं। ऐसे में इस सीट पर मुकाबला दिलचस्प होने की उम्मीद की जा रही है।