Bihar Lok Sabha Election Results 2019 : लोकसभा चुनाव 2019 में बिहार में एनडीए को प्रचंड जीत मिली है। यहां की 40 लोकसभा सीटों में से 37 सीटें भाजपा और सहयोगी दलों को मिली हैं। वहीं कांग्रेस महज एक ही सीट पर सिमट गई है, जबकि अन्य को दो सीटें मिली हैं। भाजपा को 16 सीटें, जदयू को 15 सीटें और लोजपा को छह सीटें मिली हैं।

भाजपा के प्रत्‍याशी गिरिराज सिंह ने कन्‍हैया कुमार को करारी शिकस्‍त दी है। यहां बेगुसराय से बीजेपी प्रत्‍याशी सिंह ने अपने प्रतिद्वंदी कन्‍हैया कुमार को 4 लाख 22 हजार 217 वोटों से हराया है। बिहार की 40 सीटों पर दो गठबंधनों के बीच आमने-सामने की लड़ाई थी। लोकसभा चुनाव 2019 में सियासत के कई दिग्गज अपनी तकदीर आजमा रहे हैं। इनमें रविशंकर प्रसाद, शत्रुघ्न सिन्हा, कन्हैया कुमार, शरद यादव, पप्पू यादव, गिरिराज सिंह, रघुवंश प्रसाद सिंह प्रमुख हैं।

बिहार में इस बार नए समीकरणों के साथ लोकसभा चुनाव लड़ा गया है। एक तरफ बिहार के कद्दावर नेता लालू यादव की सेना, तो दूसरी तरफ भाजपा के सिपहसालार मैदान-ए-जंग में डटे रहे। लालू यादव की अनुपस्थिति में उनके बेटे तेजस्वी यादव कमान संभाले हुए हैं। आरजेडी के नेतृत्व में कांग्रेस के अलावा बिहार के कुछ क्षेत्रीय दल है। दूसरी और नीतीश कुमार की उपलब्धियों के साथ एनडीए को मोदी के नाम का सहारा रहा और चुनाव की वैतरणी को पार करने के लिए हरसंभव कोशिशें की गई।

अब नजर डालते हैं सूबे की कुछ खास सीटों के मिजाज पर। बिहार की पाटलीपुत्र लोकसभा सीट से राष्ट्रीय जनता दल ने लालू प्रसाद यादव की बेटी मीसा भारती चुनाव लड़ रही थीं, जिन्हें भाजपा के रामकृपाल यादव ने 39 हजार 321 मतों से हरा दिया है। रामकृपाल यादव भारत के 14वीं लोकसभा के सदस्य रह चुके हैं और वे बिहार के पटना (अब पटना साहिब) लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से सांसद रह चुके हैं। वे राष्ट्रीय जनता दल के बड़े नेता थे, जो कि अब भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो चुके हैं।

पटना साहिब लोकसभा सीट पर भी कांटे का मुकाबला है, जहां भाजपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए शत्रुघ्न सिन्हा और मोदी के मंत्री रविशंकर प्रसाद के बीच मुकाबला था। यहां कायस्थ वोट महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और ये दोनों भी कायस्थ हैं। रविशंकर प्रसाद को अपने ही पुराने साथी शत्रुघ्न सिन्हा को दो लाख 84 हजार 657 वोटों से हरा दिया है।

मधेपुरा सीट से जन अधिकारी पार्टी के पप्पू यादव मैदान में है। उनका मुकाबला आरजेडी के शरद यादव और जेडीयू के दिनेश चंद्र यादव से था। दिनेश चंद्र यादव ने तीन लाख एक हजार 527 वोटों से जीत हासिल की है।मधुबनी में त्रिकोणीय मुकाबला है। भाजपा ने पांच बार सांसद रहे हुकुमदेव नारायण यादव के बेटे अशोक यादव को टिकट दिया था, तो वीआईपी के बद्री कुमार पूर्वे को उतारा था। कांग्रेस के बागी नेता शकील अहमद के निर्दलीय ताल ठोकने से मुकाबले को त्रिकोणीय हो गया था। मगर, अशोक यादव ने चार लाख 54 हजार 940 वोटों से जीत हासिल की है।

सारण सीट को पहले छपरा के नाम से जाना जाता था। लालू यहां से चार बार सांसद चुने गए हैं। पहली बार 1977 में और उसके बाद 1989, 2004 और 2009 में। इस बार यहां चंद्रिका राय का मुकाबला भाजपा के मौजूदा सांसद राजीव प्रताप रूडी से है। इसी तरह, पासवान सात बार से हाजीपुर के सांसद रहे हैं। इस बार उनके भाई पशुपति कुमार पारस का मुकाबला आरजेडी के शिवचंद्र राम से है। भाजपा के रूडी ने 1.38 लाख वोटों से जीत दर्ज की है।

सीतामढ़ी लोकसभा सीट पर शरद यादव और नीतीश कुमार की प्रतिष्‍ठा दांव पर थी। यहां से लालू की पार्टी के अर्जुन राय के मुकाबला जदयू के सुनील कुमार पिंटू से है। पिंटू ने दो लाख 50 हजार मतों से जीत हासिल की है।