वड़ोदरा। गुजरात की वड़ोदरा लोकसभा सीट भाजपा का अभेद्य किला रहा है। यहां से भाजपा पिछले 5 लोकसभा चुनाव से लगातार जीत हासिल करती आई है। साल 1998 के बाद से अब तक इस सीट पर भाजपा को कभी हार का सामना नहीं करना पड़ा है। वड़ोदरा सीट देश की हाईप्रोफाइल सीटों में भी शामिल रही है। खुद पीएम मोदी भी इस सीट से चुनाव लड़कर भारी मतों से जीत हासिल कर चुके हैं।

साल 2014 में भी पीएम मोदी ने इस सीट से बड़ी जीत हासिल करते हुए कांग्रेस उम्मीदवार मधुसूदन मिस्त्री को पटखनी दी थी। हालांकि वाराणसी से भी जीत हासिल करने के बाद मोदी ने वड़ोदरा सीट को छोड़ दिया था।

मोदी के सीट छोड़ने के बाद हुए उपचुनाव में भी इस सीट से भाजपा ने बड़ी जीत हासिल की थी। भाजपा प्रत्याशी रंजनबेन भट्ट ने कांग्रेस के नरेंद्र रावत को हराते हुए लगभग 45 फीसदी वोट हासिल किए थे।

भाजपा के लिए इस सीट से दो फैक्टर हमेशा प्रभावी रहे हैं, एक तो शहरी इलाका होना और दूसरा सवर्ण वोटर्स होना। इस लोकसभा सीट में जनसंख्या के लिहाज से 80 फीसदी वोटर्स शहरी क्षेत्र में रहते हैं, वहीं सिर्फ 20 फीसदी वोटर्स ही ग्रामीण इलाकों में रहने वाले हैं। इतना ही नहीं अल्पसंख्यक वोट भी इस सीट पर 10 फीसदी से कम हैं।

वड़ोदरा लोकसभा सीट के अंतर्गत 7 विधानसभाएं शामिल हैं, इसमें सावली, वघोडिआ, वड़ोदरा शहर, मंजलपुर, सयाजीगंज, अकोटा और रावपुरा शामिल हैं। इस बार वड़ोदरा सीट से कांग्रेस ने प्रशांत पटेल को टिकट दिया है, वहीं भाजपा ने मौजूदा सांसद रंजनबेन भट्ट पर फिर भरोसा जताया है।

पिछले दो दशक में इस सीट पर भाजपा ही हावी रही है, हालांकि इस सीट पर कांग्रेस की जीत का सबसे सुनहरा अवसर साल 2004 में आया था, जब रॉयल फैमिली से ताल्लुक रखने वाले सत्यजीत गायकवाड़ सिर्फ 6603 वोटों से जयाबेन ठक्कर से हार गए थे। इस लोकसभा सीट की जनसंख्या 23 लाख से ज्यादा है,वहीं 16 लाख से ज्यादा वोटर्स हैं।