कन्नौज। यूपी की कन्नौज सीट पर यादव परिवार की बहू डिम्पल को हार का मुंह देखने को मिला है। यहां बीजेपी प्रत्‍याशी सुब्रत पाठक ने 12353 वोटों से जीत दर्ज की है। उन्हें 49.37 फीसद वोट मिले हैं, जबकि डिंपल को 48.29 फीसद वोट मिले थे। कन्नौज लोकसभा सीट जीतने और सपा नेता डिंपल यादव को हराने पर भाजपा प्रत्याशी सुब्रत पाठक ने कहा कि यह कन्नौज की जनता की जीत है। यह जनादेश समाजवादी पार्टी के अत्याचार, भ्रष्टाचार और वंशवाद की राजनीति के खिलाफ है।

इस बार डिंपल यादव, भाजपा के सुब्रत पाठक से कड़ी टक्कर मिली थी। वह साल 2014 में जीती थी, लेकिन अंतर 20 हजार से भी मतों का रहा था। भाजपा को उम्मीद थी कि वह इस बार जीत दर्ज करने में कामयाब रहेगी।

यही कारण रहा कि भाजपा ने 2014 में डिंपल को कड़ी टक्कर देने वाले सुब्रत पाठक को इस बार भी पाठक को प्रत्याशी बनाया था। हालांकि सपा-बसपा गठबंधन के कारण डिंपल का पलड़ा भारी बताया जा रहा था।

मायावती ने भी डिम्पल के लिए रैली की थी और डिम्पल का बसपा सुप्रीम का आशीर्वाद लेते हुए फोटो खूब वायरल हुआ था। यहां लोकसभा चुनाव के चौथे चरण में 29 अप्रैल, सोमवार को वोटिंग हुई थी। मतदान के दौरान ईवीएम में खराबी का मु्ददा समाजवादी पार्टी ने उठाया था।

इस सीट पर भाजपा ने आखिरी बार 1996 में जीत दर्ज की थी। तब चंद्रभूषण सिंह ने छोटेसिंह यादव को हराया। उसके बाद से लगातार 7 बार सपा प्रत्याशी विजयी होता रहा है।

यह भी कम रोचक नहीं है कि इस सीट पर राम मनोहर लोहिया (1967) और शीला दीक्षित (1984) में चुनाव जीत चुके हैं। मुलायम सिंह यादव के परिवार का 1999 से कब्जा रहा।

1999 में मुलायम सिंह यादव और उसके बाद तीन बार (2000, 2004, 2009) में अखिलेश यादव यहां से सांसद रहे। डिंपल यादव दो बार से सांसद रहीं।

कन्नौज सीट पर इस बार के मुकाबले को लेकर तरह-तरह की बातें हुई थीं। कुछ लोग कह रहे थे कि डिंपल को गठबंधन (सपा+बसपा) का फायदा होगा, वहीं कुछ की दलील थी कि भाजपा पिछली बार से भी बड़ी चुनौती दे रही है।

भाजपा ने चुनाव से पहले बड़ा दांव खेलते हुए निर्मल तिवारी को अपने पाले में लाने में कामयाबी हासिल की थी। तिवारी क्षेत्र में बसपा के बड़े नेता और भाजपा को उम्मीद थी कि इसका फायदा होगा।