धनंजय प्रताप सिंह, भोपाल। मध्यप्रदेश के मालवा- निमाड़ अंचल में भाजपा के मौजूदा चेहरे अब पार्टी के लिए चुनौती बनते नजर आ रहे हैं। पार्टी नेताओं द्वारा कराए गए सर्वे में जो तथ्य सामने आए हैं, उसके मुताबिक ज्यादातर सांसदों का टिकट काटना पड़ेगा। इंदौर को लेकर पार्टी की धारणा है कि यहां से प्रत्याशी कोई भी हो पार्टी की जीत तय है पर यह स्थिति बाकी सीटों पर नहीं है। सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक धार में सावित्री ठाकुर, मंदसौर में सुधीर गुप्ता, खंडवा में नंदकुमार सिंह चौहान, खरगोन में सुभाष पटेल (सभी मौजूदा सांसद) की सीट पर प्रत्याशी बदले बिना जीत पाना मुश्किल है।

वहीं रतलाम-झाबुआ में भाजपा के पास कोई मजबूत प्रत्याशी नहीं है। उज्जैन में जातिगत समीकरणों के चलते सांसद चिंतामणि मालवीय टिकट के लिए फिर मजबूत दावेदारी कर रहे हैं। देवास में मनोहर ऊंटवाल की जगह नए प्रत्याशी की तलाश है। मालवा अंचल की आठ सीटों पर भाजपा को आदिवासी बहुल सीटों पर जरूर भारी मशक्कत करना पड़ेगी। पार्टी का दावा है कि बाकी सीटों पर हम मजबूत हैं।

छह लोकसभा क्षेत्रों में कांग्रेस आगे : विधानसभा चुनाव 2018 के परिणामों के हिसाब से समझा जाए तो इस अंचल की आठ लोकसभा सीटों में से निर्दलीय के साथ छह सीट पर कांग्रेस आगे रही है। भाजपा इंदौर में चार-चार की बराबरी पर और मंदसौर में एकतरफा आगे रही है। कुल मिलाकर देखा जाए तो मालवा और निमाड़ की आठ लोकसभा की कुल 64 सीटों में से कांग्रेस 35, कांग्रेस समर्थक निर्दलीय तीन और भाजपा 26 सीटों पर आगे रही है।

विधानसभा चुनाव में भाजपा को 12 आदिवासी सीटों का हुआ था नुकसान

विधानसभा चुनाव 2018 में भाजपा को मालवा- निमाड़ की 22 आदिवासी सीटों में से 12 का नुकसान हुआ था। वर्ष 2013 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को यहां से 18 सीटें मिली थीं और कांग्रेस के पास मात्र चार सीटें थीं। वहीं 2018 के चुनाव में एकदम उल्टा माहौल बन गया। कांग्रेस को 16 सीटें मिलीं तो भाजपा को मतदाताओं ने मात्र छह सीटों पर समेट दिया। पार्टी नेताओं की मानें तो इस नुकसान की वजह जय युवा आदिवासी शक्ति (जयस) भी है। जयस पहले सामाजिक संगठन के रूप में काम किया करता था लेकिन इस चुनाव में जयस के संरक्षक डॉ. हीरालाल अलावा ने कांग्रेस में शामिल होकर मनावर सीट से चुनाव लड़ा। मौजूदा दौर में भी धार, रतलाम, झाबुआ और खरगोन में जयस के प्रभाव के चलते भाजपा के लिए माहौल अनुकूल नहीं है। इनमें से तीन लोकसभा क्षेत्र अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं। दो पर भाजपा और एक पर कांग्रेस का कब्जा है।

जीतने वाले प्रत्याशी को ही टिकट देंगे

लोकसभा का चुनाव राष्ट्रीय मुद्दों पर लड़ा जा रहा है। पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति सिर्फ जीतने वाले प्रत्याशी को ही टिकट देगी। हम मोदी सरकार की उपलब्धियों, देश की सुरक्षा और भ्रष्टाचार मुक्त शासन को जनता के बीच ले जाएंगे। इसी आधार पर वोट मांगेंगे। मालवा और निमाड़ की आठ सीटों में सभी पर भाजपा जीतेगी। रतलाम सीट उपचुनाव में पार्टी हारी थी, इस बार फिर वहां भी भाजपा जीतेगी। प्रदेश की कमलनाथ सरकार ने किसानों और बेरोजगारों के साथ जिस प्रकार का छल किया है, हम उसे बेनकाब करेंगे। - गोविंद मालू, प्रदेश प्रवक्ता, भाजपा मप्र