नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव 2019 के आखिरी चरण की वोटिंग अभी बाकी है। इसके बाद 23 मई को नतीजे आएंगे, लेकिन विपक्षी दल अभी से सियासी गणित जमाने में लग गए हैं। इस बीच, कांग्रेस ने बड़ा संकेत दिया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा है कि एनडीए को सत्ता में आने से रोकने के लिए कांग्रेस किसी भी दल या गठबंधन को समर्थन देने को तैयार है। चाहे पीएम पद कांग्रेस को मिले या नहीं। बकौल आजाद, 23 मई को नतीजों के बाद यदि कांग्रेस के पक्ष में आम सहमति बनती है तो वह केंद्र में अगली सरकार का नेतृत्‍व करेगी। लेकिन, यदि एंटी एनडीए सर्वदलीय बैठक में कांग्रेस के पक्ष में सर्वसम्‍मति नहीं बनती तो हम यह मुद्दा नहीं बनाएंगे कि पार्टी किसी और को प्रधानमंत्री नहीं बनने देगी। बता दें, देश में गैर-भाजपाई और गैर-कांग्रेसी थर्ड फ्रंट को लेकर पहले चर्चा हो रही है। इस बीच, कांग्रेस ने यह बड़ी बात कही है।

आजाद ने कहा, शुरू से हमारा एक मात्र मकसद रहा है कि केंद्र में एनडीए सरकार दोबारा नहीं बनना चाहिए। अब भी हमारा मानना है कि भाजपा की सरकार नहीं बनेगी। इसलिए कांग्रेस किसी भी गैर भाजपा सरकार को समर्थन देने को तैयार है। यहां तक कि एडीए में कई ऐसे दल हैं, जिनकी विचारधारा भाजपा से नहीं मिलती है। सत्ता पाने या किसी मजबूरी के कारण वे उनके साथ हैं।

यह है फेडरल फ्रंट की रणनीति

हाल ही में तेलंगाना में सत्तारूढ़ तेलंगाना राष्ट्र समिति (TRS) ने उम्मीद जताई थी कि लोकसभा चुनावों के बाद त्रिशंकु संसद की सूरत में रीजनल पार्टियां मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव द्वारा प्रस्तावित फेडरल फ्रंट में शामिल हो जाएंगी। TRS के MLC पल्ला राजेश्वर रेड्डी ने कहा था कि द्रमुक अध्यक्ष एमके स्टालिन का कांग्रेस के साथ उनकी पार्टी के गठबंधन की बात दोहराना फेडरल फ्रंट गठन की कोशिशों के लिए कतई धक्का नहीं है। उनके मुताबिक, 'अगर उन्हें (NDA और UPA) अपने दम पर बहुमत हासिल नहीं हुआ और हम उस स्थिति में हुए तो वे (NDA और UPA) हमें समर्थन दे सकते हैं।'